एमआईसी से मंजूरी के बाद भी नहीं मिल रही अंतिम स्वीकृति, तीन माह से नहीं हुई निगम सदन की साधारण बैठक
उज्जैन, अग्निपथ। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत शहर में चल रहे सडक़ चौड़ीकरण से प्रभावित लोगों के मुआवजे की प्रक्रिया नगर निगम सदन की बैठक नहीं होने से अटकी हुई है। मुआवजे के कई प्रकरण महापौर परिषद (एमआईसी) से स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन निगम सदन की अंतिम मंजूरी नहीं मिलने के कारण प्रभावितों को राहत नहीं मिल पा रही है। पिछले तीन माह से सदन की साधारण बैठक नहीं होने के चलते हजारों प्रभावितों की उम्मीदें लंबित प्रकरणों पर टिकी हैं।
सिंहस्थ के मद्देनजर शहर के विभिन्न मार्गों पर चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इसकी जद में आने से कई लोगों के मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान आंशिक या पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ लोगों के निर्माण का हिस्सा तोड़ा गया है, जबकि कई प्रतिष्ठानों और मकानों को पूरी तरह हटाना पड़ा है। ऐसे प्रभावितों को मुआवजा देने के लिए नगर निगम ने प्रकरण तैयार किए हैं।
इनमें से कई प्रकरण एमआईसी की बैठक में रखे गए थे और परिषद से स्वीकृति भी मिल चुकी है। इसके बावजूद निगम सदन की मंजूरी नहीं मिलने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
तीन माह से साधारण बैठक नहीं
नगर निगम सदन की साधारण बैठक में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी जाती है। नियमानुसार सदन की बैठक प्रत्येक दो माह में आयोजित की जानी चाहिए, लेकिन पिछले तीन माह से साधारण बैठक नहीं होने के कारण मुआवजा प्रकरणों सहित पार्षदों के कई मुद्दे लंबित हैं। अब तक आयोजित बैठकों में विशेष सम्मिलन पर जोर रहा है, जबकि साधारण सम्मिलन नहीं होने से नियमित कामकाज प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
महापौर के पास बैठक बुलाने का अधिकार
निगम सदन की बैठक आहूत करने का अधिकार महापौर के पास है। इसके बावजूद अब तक साधारण बैठक नहीं बुलाई गई है। बैठक नहीं होने के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। यदि निर्धारित अंतराल पर सदन की बैठकें आयोजित हों, तो मुआवजा प्रकरणों को अंतिम मंजूरी मिलने के साथ ही पार्षदों को अपने क्षेत्रों की समस्याएं और अन्य जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर भी मिल सकेगा।
चौड़ीकरण के कारण प्रभावित हुए लोगों के लिए मुआवजे की राशि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में एमआईसी से स्वीकृति मिलने के बाद भी अंतिम मंजूरी के इंतजार में प्रकरण लंबित रहना प्रभावितों की परेशानी बढ़ा रहा है।
अब निगाहें निगम सदन की अगली साधारण बैठक पर टिकी हैं, ताकि लंबित प्रकरणों पर निर्णय हो सके और प्रभावितों को मुआवजे की प्रक्रिया में आगे बढऩे का रास्ता मिल सके।

