आरक्षण पर उमा भारती के तीखे तेवर: बोलीं- जब तक बड़े पदों के बच्चे सरकारी स्कूल नहीं जाते, कोई माई का लाल नहीं छीन सकता हक

भोपाल, अग्निपथ। मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण के मुद्दे पर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मंगलवार को भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित राजा हिरदे शाह लोधी की शौर्य यात्रा के समापन अवसर पर उमा भारती ने हुंकार भरते हुए कहा कि देश में जब तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस जैसे शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के बच्चे आम जनता के साथ सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण को दुनिया की कोई ताकत नहीं छीन सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक बराबरी केवल कागजी कानूनों से नहीं, बल्कि व्यवहार और शिक्षा की समानता से आएगी।

शिवराज के पुराने बयान की यादें हुईं ताजा

उमा भारती का ‘माई का लाल’ वाला यह बयान प्रदेश की सियासत में नया नहीं है। इससे पहले वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसी शब्दावली का प्रयोग करते हुए कहा था कि उनके रहते कोई आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। हालांकि, उस समय इस बयान ने सवर्ण समाज और करणी सेना को नाराज कर दिया था, जिसका परिणाम 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के रूप में सामने आया था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या उमा भारती का यह रुख आगामी समीकरणों पर वैसा ही प्रभाव डालेगा।

लोधी समाज की एकजुटता और तीसरी आजादी का आह्वान

कार्यक्रम के दौरान उमा भारती ने लोधी समाज की राजनीतिक शक्ति का अहसास कराते हुए कहा कि यह समाज सरकारें बनाने और गिराने का माद्दा रखता है। उन्होंने इसे आजादी की तीसरी लड़ाई करार देते हुए कहा कि पहली लड़ाई राम मंदिर और दूसरी तिरंगे के स्वाभिमान के लिए थी, अब तीसरी लड़ाई पूर्ण समानता के लिए होनी चाहिए। उमा ने जोर देकर कहा कि भाजपा को पिछड़ा विरोधी कहने वालों का भ्रम अब टूट चुका है।

पाठ्यक्रम में शामिल होगी राजा हिरदे शाह की शौर्य गाथा

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि राजा हिरदे शाह लोधी का जीवन संघर्ष और अंग्रेजों के खिलाफ उनकी वीरता को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जीवन पर गहन शोध कराया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें। कार्यक्रम में पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने भी अपनी बात रखी और लोधी समाज से कम से कम एक मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भारत रत्न देने की पैरवी की।

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