उज्जैन, अग्निपथ। सोशल मीडिया पर खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन की खबरें वायरल होने के बाद अब यह मुद्दा गरमा गया है। इस मामले में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर समाधान निकालने की अपील की है। वहीं दूसरी ओर सिंहस्थ विकास प्राधिकरण के नए अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल ने मंदिर के विस्थापन का समर्थन किया है। इसी बीच साध्वी हर्षानंद गिरि ने भी मंदिर पहुंचकर विरोध जताया है और प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र में कहा है कि आप स्वयं उज्जैयनी के रहने वाले हैं। उज्जैयनी शहर और वहां के सभी धार्मिक स्थलों की गरिमा को आपसे बेहतर और कोई नहीं समझ सकता। मुझे विश्वास है कि खड़े हनुमान मंदिर के विषय में आप भी समाधान सोच रहे होंगे।
उमा भारती ने भोपाल का उदाहरण देते हुए लिखा कि शिवराज सरकार के समय कमलापति पार्क के आगे जब सड़क चौड़ीकरण का कार्य हुआ था, तब वहां स्थित मस्जिद को छुए बिना पूरा रोड प्लान बदल दिया गया था। हम हमेशा विकास और आस्था को एक साथ लेकर चलते हैं। यही तरीका उज्जैयनी के खड़े हनुमान मंदिर के लिए भी अपनाया जा सकता है।
सिंहस्थ प्राधिकरण अध्यक्ष ने किया विस्थापन का समर्थन
सिंहस्थ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल ने एक साक्षात्कार में विस्थापन का पक्ष लेते हुए कहा कि शहर में विकास के कार्य तेजी से चल रहे हैं। चौड़ीकरण के दौरान कई धार्मिक स्थल आए हैं, जिन्हें पुजारियों और स्थानीय निवासियों की सहमति से हटाया गया है। खड़े हनुमान जी सभी की आस्था का केंद्र हैं। अंतिम सवारी से पहले मार्ग निकालने के लिए मंदिर को हटाया जाना तय हुआ था।
उन्होंने बताया कि इस विषय में पुजारी से बातचीत हुई थी और उन्होंने नवनिर्मित मंदिर भी देखा था। पुजारी इसी तनाव के कारण अस्पताल में भर्ती हो गए थे। यह शुरुआती विरोध है और इसका जल्द ही संतोषप्रद समाधान निकल जाएगा। हनुमान जी की मूर्ति को हटाया नहीं गया है, केवल आसपास के हिस्से में खुदाई हुई थी। खड़े हनुमान जी को पूरी व्यवस्था के साथ नए मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
साध्वी हर्षानंद गिरि ने दिया 2 दिन का अल्टीमेटम
साध्वी हर्षानंद गिरि (हर्षा रिछारिया) गुरुवार को खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं। उन्होंने वहां पूजा-अर्चना की और प्रतिमा हटाने के प्रयासों का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने मांग की कि प्रशासन के अधिकारी मंदिर आकर माफी मांगें, पूजा करें और मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे अनशन और धरना-प्रदर्शन करेंगी। सरकार को दो दिन का समय देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इतनी शक्ति मिले कि वे बाबा के लिए आवाज उठा सकें। इस दौरान उन्होंने मंदिर के पुजारी से नजर भी उतरवाई।

