उज्जैन, अग्निपथ। उज्जैन के देवास-मक्सी रोड बायपास पर स्थित ग्राम करोंदिया में सोमवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई। यहाँ करीब 55 फीट गहरी पानी से भरी खदान में नहाने उतरे 9 दोस्तों में से दो किशोर गहरे पानी में समा गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल ने मोर्चा संभाला और करीब 12 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद दोनों के शवों को बाहर निकाला जा सका। मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
कोचिंग का बहाना और पिकनिक की योजना
जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे पांड्याखेड़ी, गणेशपुरा, कंचनपुरा और अशोकनगर इलाके के 9 दोस्त घर से यह कहकर निकले थे कि वे कोचिंग जा रहे हैं। इन सभी छात्रों ने हाल ही में 10वीं और 11वीं की परीक्षाएं उत्तीर्ण की थीं। कोचिंग जाने के बजाय उन्होंने मोबाइल पर आसपास की लोकेशन सर्च की और पिकनिक मनाने के लिए ग्राम करोंदिया स्थित खदान पर पहुँच गए। ई-रिक्शा से पहुँचे इन किशोरों को अंदाजा नहीं था कि उनकी यह मस्ती मातम में बदल जाएगी।
गहरे पानी में जाने से हुआ हादसा
खदान पहुँचने के बाद सात दोस्त किनारे पर ही नहा रहे थे, जबकि शुभम पिता किरण जाटव (निवासी किशनपुरा) और अनस पिता हामिद खान (निवासी अशोकनगर) गहरे पानी की ओर चले गए। अचानक दोनों डूबने लगे। उन्हें डूबता देख बाकी दोस्त घबरा गए। एक दोस्त ने उन्हें बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन पानी गहरा होने के कारण वह सफल नहीं हो सका और देखते ही देखते दोनों आंखों से ओझल हो गए।
अंडर वॉटर कैमरे से हुई तलाश
हादसे की खबर मिलते ही नागझिरी, पंवासा और नरवर थाना पुलिस सहित होमगार्ड और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुँचीं। जिला होमगार्ड कमांडेंट संतोष कुमार जाट के नेतृत्व में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। खदान की गहराई अधिक होने के कारण अंडर वॉटर कैमरे की मदद ली गई, जिसमें करीब 55 फीट नीचे बच्चों के शव नजर आए। रात करीब 10 बजे शुभम का शव मिला, जबकि अनस का शव देर रात करीब 3 बजे निकाला जा सका।
9 साल की मन्नतों के बाद जन्मा था शुभम
इस हादसे ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। शुभम अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, जिसका जन्म विवाह के 9 साल बाद बड़ी मन्नतों के बाद हुआ था। वह पढ़ाई में बेहद होनहार था और हाल ही में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हुआ था। वहीं अनस के पिता पेशे से ड्राइवर हैं और वह पांच भाई-बहनों में से एक था। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
