कांजी हाउस रसीद कांड: लोकायुक्त को गलत जानकारी देकर उलझे निगम अधिकारी

उज्जैन, अग्निपथ। कांजी हाउस के फर्जी रसीदकांड में नगर निगम के अधिकारी भी फंस सकते है। वजह प्रकरण के संबंध में लोकायुक्त को गलत जानकारी देना है। मामले में मंगलवार को लोकायुक्त ने निगम को अंतिम पत्र लिखा है। सहीं जानकारी नहीं देने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

निगम के कांजी हाउस के स्वास्थ्य अधिकारी पुरुषोत्तम दुबे, वर्कशॉप प्रभारी उमेश बैस व तात्कालीन खिडक़ प्रभारी जितेंद्र थनवार पर मवेशी छोडऩे के एवज में नकली रसीद काटकर जेब भरने का आरोप है। वर्ष 2019 में दर्ज इस केस में लोकायुक्त डीएसपी वेदांत शर्मा को विवेचना के दौरान रोचक प्रमाण मिले। मालूम पड़ा कि खिडक़ प्रभारी ने कई मवेशी मालिकों की रसीद हजारों रुपए की काटी, प्रकरण के फरियादी ने सूचना के अधिकार में जानकारी मांगी तो संबंधित व्यक्ति को दी रसीद की छायाप्रति में राशि अलग दर्शायी और जांच में लोकायुक्त ने जानकारी मांगी तो अलग।

एक ही कट्टे में एक दिनांक व व्यक्ती की एक ही नंबर की तीन रसीदों में अलग राशि मिलने पर धांधली साबित हो गई है। यह भी स्पष्ट हो गया कि इसी धांधली के कारण अधिकारी असल दस्तावेज देने से कतरा रहे है। यहीं वजह है कि लोकायुक्त अब केस के निराकरण के लिए मुख्यालय को पत्र भेजकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई का मन बना रही है।

ऐसे खुला था मामला

याद रहे मोहन नगर निवासी राजेश पिता मनोहरलाल ने 12 दिसंबर 1997 को लोकायुक्त मुख्यालय को फर्जी रसीदकांड को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने मवेशी मालिकों की काटी गई रसीद के साथ आरटीआई में निकाली रसीदों की प्रति भी संलग्न की थी। धांधली स्पष्ट होने पर लोकायुक्त में दुबे, बैस व थनवार पर धारा 420,467,468, 471, 120 व धारा 7 में केस दर्ज कर डीएसपी शर्मा को मामला सौंपा। उन्होंने जांच शुरू की तो मिले दस्तावेज से मामला उजागर हो गया था।

अब तक निगम को भेजे नोटिस

लोकायुक्त रिकार्डनुसार केस की जानकारी मांगने के लिए वर्ष 2019 में 27 अप्रैल, 13 मई, 29 मई, 6 अगस्त को निगम को पत्र भेजे गए। इस वर्ष 26 जून, 15 जुलाई, 24 अगस्त व 30 सितंबर और 1 दिसंबर को पत्र भेजा है। हालांकि लगातार पत्र के बाद नाराजगी जताने पर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने डिप्टी कमिश्रर संजेश गुप्ता को 30 सितंबर को भेजा। गुप्ता ने जल्द दस्तावेज भेजने का भरौसा दिलाया और जानकारी भेजी,लेकिन वह नहीं जो मांगी। नतीजतन फिर पत्रों का सिलसिला शुरू हुआ, जो अंतिम पत्र तक पहुंच गया।

इनका कहना

एक ही नंबर की रसीदों के मिलने से धांधली स्पष्ट हो गई। बावजूद जानकारी नहीं भेजने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध साक्ष्य छूपाने के लिए आईपीसी की धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
-वेदांत गुप्ता, डीएसपी लोकायुक्त

प्रकरण मेरे समय का नहीं है। एक माह पहले कमिश्नर ने जानकारी देने भेजा था। जानकारी भिजवाई तो दूसरी मांग ली। ऑफिस अधीक्षक सक्सेना को जानकारी भेजने का कहा था। पता करता हंू क्या हुआ।
– संजेश गुप्ता, डिप्टी कमिश्नर, नगर निगम

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