महिला आरक्षण बिल गिरने पर पीएम ने मांगी माफी; कांग्रेस, सपा और टीएमसी पर साधा निशाना
नई दिल्ली, अग्निपथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने विशेष संबोधन में महिला आरक्षण विधेयक (131वां संशोधन) के लोकसभा में पारित न हो पाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। लगभग 30 मिनट के अपने भाषण में प्रधानमंत्री भावुक नजर आए और उन्होंने देश की माताओं-बहनों से हाथ जोड़कर माफी मांगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने आधी आबादी का हक छीना है, वे नारी शक्ति के अपराधी हैं और उन्हें इस ‘भ्रूणहत्या’ के समान पाप की सजा जरूर मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कल संसद में जो हुआ, उसने परिवारवादी पार्टियों का असली चेहरा उजागर कर दिया है। उनके अनुसार, यह केवल एक विधेयक का गिरना नहीं था, बल्कि करोड़ों महिलाओं के सपनों को बेरहमी से कुचलने जैसा था। प्रधानमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब नारी हित का यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव सदन में गिरा, तब कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों के नेता मेजें थपथपाकर खुशियां मना रहे थे। नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती और इन नेताओं का यह व्यवहार हर महिला के मन में हमेशा एक टीस की तरह बना रहेगा।
परिवारवाद के डर ने रोका महिलाओं का रास्ता
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके साथी दल महिलाओं के सशक्तिकरण से असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्हें डर है कि यदि सामान्य परिवारों की महिलाएं राजनीति में आगे आईं, तो उनकी ‘वंशवादी राजनीति’ खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि परिसीमन के माध्यम से सीटों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य उत्तर से दक्षिण तक सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना था, लेकिन विपक्ष ने झूठ का जाल बुनकर जनता को गुमराह किया। कांग्रेस ने हमेशा की तरह अंग्रेजों वाली ‘बांटो और राज करो’ की नीति अपनाई और राज्यों के बीच विभाजन की आग सुलझाने का प्रयास किया।
राज्यों के विकास के अवसर को विपक्ष ने ठुकराया
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि यह बिल सभी राज्यों के लिए एक सुनहरा अवसर था। यदि यह पारित होता, तो उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में सांसदों और विधायकों की संख्या में भारी वृद्धि होती। उन्होंने कहा कि डीएमके और टीएमसी जैसे दलों ने अपने ही राज्यों के लोगों को धोखा दिया है। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बिल का विरोध करके सपा ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के सपनों को अपने पैरों तले रौंद दिया है। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, फिर भी विपक्ष ने कुतर्क गढ़कर विकास के पहिये को रोकने का काम किया।
सुधार विरोधी और परजीवी कांग्रेस पर तीखा हमला
कांग्रेस के इतिहास को याद दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने उसे एक ‘सुधार विरोधी’ (एंटी रिफॉर्म) पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज एक परजीवी की तरह दूसरे क्षेत्रीय दलों के सहारे जीवित है और वह नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दल सशक्त हों। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 40 वर्षों से महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालने का जो पैटर्न चला आ रहा है, कांग्रेस ने एक बार फिर उसे दोहराया है। उन्होंने कहा, “मुझे व्यक्तिगत रूप से आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेगी, लेकिन उन्होंने अपना मुखौटा उतार दिया है।”
अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि 21वीं सदी की जागरूक नारी इन षड्यंत्रों को भली-भांति समझ चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भले ही इस बार बाधाएं आई हों, लेकिन नारी शक्ति को उनका हक दिलाने का संकल्प अडिग है। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि संसद में मेजें थपथपाने वाले इन नेताओं को जब जनता के बीच जाना होगा, तब उन्हें नारी शक्ति के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
