आगर-मालवा, अग्निपथ। आगर-मालवा के गौरव और नगर की शान कहे जाने वाले मोती सागर तथा रत्न सागर तालाब कभी अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए जाने जाते थे। नगर पालिका ने करोड़ों रुपये खर्च कर मोती सागर तालाब के आसपास भव्य सौंदर्यीकरण का कार्य कराया था, जिससे यह क्षेत्र पूरे नगर के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन चुका था। दूर-दूर से लोग यहाँ की कंचन जैसी काया और साफ पानी को निहारने आते थे। लेकिन आज कुछ चंद लालची लोगों और भू-माफियाओं के स्वार्थ के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। विकास के नाम पर विनाश का यह खेल खुलेआम खेला जा रहा है।
फोरलेन के चक्कर में 250 बीघा जमीन की समतल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नव-निर्मित फोरलेन सड़क के किनारे की बेशकीमती जमीन पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए भू-माफियाओं ने तालाब के दूसरे छोर पर स्थित लगभग ढाई सौ बीघा जमीन को जेसीबी और आधुनिक मशीनों से खोदकर समतल कर दिया। इस अंधाधुंध खुदाई के कारण जमीन के भीतर की लाल मिट्टी और भारी मात्रा में मलबा सतह पर आ गया। माफियाओं ने जमीन को प्लेन तो कर दिया, लेकिन उससे निकले हजारों टन मलबे और मिट्टी को वहीं लावारिस छोड़ दिया। प्रकृति के साथ किया गया यह खिलवाड़ अब पूरे आगर नगर पर भारी पड़ रहा है।
पहली बारिश में चाय के रंग का हुआ कंचन जैसा पानी
जैसे ही वर्षा ऋतु का आगमन हुआ, मानसून की पहली बौछारों के साथ ही वह सारा मलबा और लाल मिट्टी बहकर सीधे मोती सागर तालाब में समा गई। जो तालाब कभी अपनी स्वच्छता के लिए मोतियों की तरह चमकता था, वह आज भू-माफियाओं की लापरवाही के कारण पूरी तरह लाल सुर्ख हो चुका है। तालाब का पानी देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो उसमें पानी नहीं, बल्कि चाय बह रही हो। जानकारों और पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इस मलबे को तुरंत नहीं रोका गया, तो एक वर्ष के भीतर पूरे तालाब में जलकुंभी अपना साम्राज्य स्थापित कर लेगी। यदि ऐसा हुआ, तो इस जलाशय का पानी किसी भी उपयोग के लायक नहीं बचेगा।
जीवन रेखा पर संकट और प्रशासन का रुख
मोती सागर तालाब सिर्फ एक जल निकाय नहीं, बल्कि आगर-मालवा की जीवन रेखा है। इस प्रकार पानी के दूषित होने से तालाब का पूरा जलीय जीवन और अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर पहुँच गया है। इस गंभीर विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष श्री निलेश जैन पटेल ने कहा कि मोती सागर तालाब की चिंता उन्हें भी है। तालाब के आसपास कुछ लोगों ने निजी स्वार्थ के लिए जमीन की अवैध खुदाई की है, जिसके कारण ही यह मलबा पानी में मिला है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन रसूखदार भू-माफियाओं पर क्या ठोस कार्यवाही करता है, या नगर की यह अनमोल धरोहर ऐसे ही चंद लालची लोगों की भेंट चढ़ जाएगी।

