नई दिल्ली । सरकार अपनी वित्तीय कमजोरी का हवाला देकर राहत से इनकार नहीं कर सकती। सरकार का कर्तव्य उन लोगों की रक्षा करना है जो अपनी रक्षा नहीं कर सकते। आपदा प्रबंधन अधिनियम (डीएमए) गंभीर परिस्थितियों में कॉन्ट्रैक्ट को ओवरराइड कर सकता है। यह बात सुप्रीम कोर्ट में वकील रविंद्र श्रीवास्तव ने कही। वे लोन मोरेटोरियम पर कोर्ट में बोल रहे थे।
उधर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बहस के दौरान कहा कि सरकार ने इस मामले में कुछ नहीं किया है। वह बस आरबीआई के सर्कुलर पर ही भरोसा कर रही है।
क्लासिफिकेशन को किसी अध्ययन पर आधारित होने की जरूरत नहीं
वकील श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी वर्गीकरण (classification) को तर्कसंगत होने या किसी अध्ययन पर आधारित होने की जरूरत है। डीएम एक्ट का इस्तेमाल इस आंकड़े को एकत्र करने के लिए किया जा सकता है न कि वित्त मंत्रालय की 2 करोड़ रुपए की सीमा में जाया जाए।
आरबीआई को और अधिक काम करने की जरूरत
उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को और भी अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। सरकार के फैसले उसकी आर्थिक क्षमता की अनदेखी नहीं कर सकते। उधारकर्ताओं के क्लास के बीच वर्गीकरण का आधार यही होना चाहिए कि लोगों को राहत मिले। बड़े उधारकर्ताओं के क्लास को परिभाषित नहीं किया गया है। वकील ने कहा कि बैंकों को अपनी क्राइटीरिया खुद स्थापित करने को छोड़ देने से समस्या उत्पन्न हो रही है। इस क्राइटीरिया से बैंकों में आपस में मतभिन्नता होगी। इससे अलग-अलग वर्किंग सिस्टम स्थापित होंगे।
मोरेटोरियम को मार्च तक बढ़ाया जाए
वकील विशाल तिवारी ने कहा कि मोरेटोरियम के लिए निर्धारित तिथि 31 दिसंबर है और इसे 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया जाना चाहिए।
डिफॉल्टर पर लगी रोक हटाई जाए
इससे पहले की सुनवाई में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने कहा कि कोर्ट को तुरंत डिफॉल्टर पर लगी रोक हटाना चाहिए। कारण कि बैंक किसी भी लोन को डिफॉल्ट करने में अब असहाय हो गए हैं। आईबीए की ओर से यह मांग वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट में की थी।
एनपीए में डालने पर लगी है रोक
बता दें कि कोरोना की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में कहा था कि जब तक कोर्ट का आदेश न हो, किसी भी लोन को डिफॉल्ट या बुरे फंसे कर्ज (एनपीए) में न डाला जाए। हालांकि बैंकों के पास ऐसे तमाम लोन हैं जो डिफॉल्ट तो हो गए हैं, पर बैंक उसे डिफॉल्ट नहीं घोषित कर पा रहे हैं। कोर्ट के आदेश की वजह से बैंक ऐसा कर रहे हैं।
क्रेडिट कार्ड वालों को नहीं मिली राहत
इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों को कंपाउंड इंटरेस्ट में रियायत का कोई फायदा नहीं मिलना चाहिए। क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले लोगों ने कोई लोन नहीं लिया है, बल्कि वे इससे खरीदारी कर रहे हैं। केंद्र ने कोरोना के दौरान लोन मोरेटोरियम पर कंपाउंड इंटरेस्ट की भरपाई करने का वादा किया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि उन्हें क्रेडिट कार्ड पर एक्स ग्रेशिया मिला है। इस पर कोर्ट ने क्रेडिट कार्ड पर यह टिप्पणी की।
संपरहैं
सुनवाई के दौरान मेहता ने कोर्ट को बताया था कि कंपाउंड इंटरेस्ट को वापस करना बैंकों की जिम्मेदारी है। कर्जदारों को इसके लिए बैंक के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। मेहता ने कहा, हमने यह फैसला लिया है कि जिन लोगों ने मोरेटोरियम के दौरान EMI भरी है, उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए। मोरेटोरियम का फायदा लेने वाले या नहीं लेने वाले दोनों को इसका फायदा होगा। इससे पहले 2 अक्टूबर को केंद्र सरकार की तरफ से यह जानकारी दी गई थी कि सरकार 2 करोड़ रुपए तक के लोन की EMI पर वसूला जाने वाला कंपाउंड इंटरेस्ट चुकाएगी।