राम मंदिर के लिए धन संग्रह अभियान: मकर संक्रांति से माघ पूर्णिमा तक 55 करोड़ घरों से लिया जाएगा चंदा; बांटा जाएगा आंदोलन से जुड़े इतिहास का पत्रक

अयोध्या। राम जन्मभूमि में बनने वाले भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब धन संग्रह अभियान चलाएगा। इसकी शुरूआत मकर संक्रांति पर्व से होगी। ट्रस्ट राम मंदिर के मॉडल का चित्र और मंदिर आंदोलन की गाथा के पत्रक के साथ गांव-गांव जाएगा। इस अभियान में 55 करोड़ लोगों से संपर्क कर उनसे सहयोग राशि लेने का निर्णय लिया है। धन संग्रह के लिए एक रुपए से लेकर 1000 रुपए तक के कूपन व रसीदें छप चुकी हैं।

माघ पूर्णिमा तक चलेगा अभियान

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया- ”हमारा उद्देश्य है कि धन संग्रह के साथ वर्तमान पीढ़ी को इस मंदिर के इतिहास की सच्चाइयों से अवगत करवाया जाए। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, अंडमान निकोबार, त्रिपुरा सभी कोनों पर यह संपर्क अभियान चलेगा। जिसमें सभी हिंदू संगठन सहयोग करेंगे। समाज को राम जन्मभूमि के बारे में पढ़ने के लिए साहित्य दिया जाएगा। भगवान का काम है, मंदिर भगवान का घर है, भगवान के कार्य में धन बाधा नहीं हो सकता। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मंदिर ट्रस्ट ने एक रुपए से लेकर दस रुपए, 100 रुपए, एक हजार रुपए के कूपन व रसीदें छापी हैं। जन-संपर्क अभियान मकर संक्रांति से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलेगा।”

सभी कंपनियों से हो चुके हैं एग्रीमेंट

चंपत राय ने कहा कि जल्द ही मंदिर निर्माण शुरू होगा। मंदिर के वास्तु का दायित्व अहमदाबाद के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा पर है। वे वर्ष 1986 से जन्मभूमि मन्दिर निर्माण की देखभाल कर रहे हैं। लार्सन टुब्रो कम्पनी को मंदिर निर्माण का कार्य दिया है। निर्माता कंपनी के सलाहकार के रूप में ट्रस्ट ने टाटा कंसल्टेंट इंजीनियर्स को चुना गया है। इन सभी कंपनियों से एग्रीमेंट हो चुके हैं।

ऐसा बनेगा मंदिर

चंपत राय ने मंदिर की डिजाइन का पूरा विवरण देते हुए बताया कि संपूर्ण मंदिर पत्थरों से बनेगा। मंदिर तीन मंजिला होगा। प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट होगी, मंदिर की लंबाई 360 फीट तथा चौड़ाई 235 फीट है। भूतल से 16.5 फीट ऊंचा मंदिर का फर्श बनेगा। भूतल से गर्भ गृह के शिखर की ऊंचाई 161 फीट होगी।

अब तक हो रहा है तकनीकी परीक्षण

धरती के नीचे 200 फीट गहराई तक मृदा परीक्षण तथा भविष्य के सम्भावित भूकम्प के प्रभाव का अध्ययन हुआ है। जमीन के नीचे 200 फीट तक भुरभुरी बालू पाई गई है। गर्भगृह के पश्चिम में कुछ दूरी पर ही सरयू नदी का प्रवाह है। इस भौगोलिक परिस्थिति में 1000 वर्ष आयु वाले पत्थरों के मन्दिर का भार सहन कर सकने वाली मजबूत व टिकाऊ नींव की ड्राइंग पर IIT मुंबई, IIT दिल्ली, IIT चेन्नई, IIT गुवाहाटी, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की, लार्सन टूब्रो व टाटा के इंजीनियर आपस में परामर्श कर रहे हैं। बहुत शीघ्र नींव का प्रारूप तैयार होकर नींव निर्माण कार्य प्रारम्भ होगा।

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