उज्जैन, अग्निपथ। उज्जैन के एमआर 5 स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड से पिछले 12 सालों से जमा 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरे का निपटान आखिरकार पूरा कर लिया गया है। बायो-मैथनिंग प्रक्रिया के माध्यम से इस कचरे को हटाते हुए उसे रीसाइकिल किया गया, जिससे मिट्टी, सीएंडडी वेस्ट और आरडीएफ जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार किए गए हैं। कचरा हटने के बाद अब यह पूरा क्षेत्र साफ-सुथरा नजर आने लगा है। नगर निगम की योजना के अनुसार, जल्द ही इस स्थान पर आकर्षक उद्यान और सेल्फी पॉइंट विकसित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र का कायाकल्प होगा।
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने बताया कि भविष्य में यहाँ दोबारा कचरा जमा न हो, इसके लिए ठोस कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। निगम का पूरा जोर अब 100 प्रतिशत सेग्रिगेशन (कचरा पृथक्करण) पर है। एमआर 5 और गोंसाघाट पर कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में संग्रहित किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में मिला-जुला कचरा पाया जाता है, तो उसे तुरंत दुरुस्त करवाकर ही आगे भेजा जाता है। कचरा प्रबंधन को पुख्ता करने के लिए ट्रांसफर स्टेशन और ट्रेंचिंग ग्राउंड पर सख्त निगरानी रखी जा रही है और अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की गई है।
शहर से प्रतिदिन निकलता है 180 टन कचरा
शहर की सफाई व्यवस्था के आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जैन से रोजाना लगभग 180 टन कचरा निकलता है। इसमें 110 टन गीला कचरा और लगभग 70 टन सूखा कचरा शामिल होता है। त्योहारों और विशेष पर्वों के दौरान सफाई की चुनौती और बढ़ जाती है, क्योंकि तब कचरे का यह आंकड़ा बढ़कर 240 टन तक पहुंच जाता है। निगम सुनिश्चित कर रहा है कि कचरा तभी उठाया जाए जब वह पूरी तरह से सेग्रिगेटेड हो।
2,500 सफाई मित्रों की विशाल टीम संभाल रही कमान
इस विशाल सफाई व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए नगर निगम के पास एक बड़ी टीम तैनात है। वर्तमान में 4 अपर आयुक्त, 3 उपायुक्त, 6 सहायक आयुक्त, 54 वार्ड स्वच्छता नोडल, 3 हेल्थ ऑफिसर, 14 स्वच्छता निरीक्षक, 92 दरोगा और 2,500 से अधिक सफाई मित्र निरंतर कार्य कर रहे हैं। इस कार्यबल में 1,700 निगम के स्थायी कर्मचारी और 800 आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं, जो शहर को स्वच्छ बनाए रखने में जुटे हैं।
