रतलाम, अग्निपथ। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा-2024 में हुए बड़े स्तर के घोटाले ने प्रदेश की सियासत और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रतलाम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। पुलिस की दो अलग-अलग टीमें इस जालसाजी की परतों को उधेड़ने में जुट गई हैं। जांच के केंद्र में रतलाम का सबसे बड़ा परीक्षा केंद्र ‘रतलाम पब्लिक स्कूल’ है, जहाँ से इस धांधली के तार जुड़े होने की आशंका है।
परीक्षा केंद्र पर पुलिस की दबिश और पूछताछ
औद्योगिक क्षेत्र थाने के उपनिरीक्षक ध्यानसिंह सोलंकी ने अपनी टीम के साथ रतलाम पब्लिक स्कूल पहुंचकर स्कूल की संचालिका संयोगिता सिंह से लंबी पूछताछ की। पुलिस ने स्कूल की पूरी इमारत का नक्शा तैयार किया है, जिसमें परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों के बैठने के कमरों, प्रवेश और निकास द्वारों तथा तैनात स्टाफ की विस्तृत जानकारी जुटाई गई है। जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि परीक्षा के दौरान सीसीटीवी कैमरों की स्थिति क्या थी और बाहरी व्यक्तियों का दखल किस स्तर पर था। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद कर्मचारी चयन मंडल ने इस स्कूल को भविष्य की सभी परीक्षाओं के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।
जादुई रफ्तार से हल किए 100 प्रश्न
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू परीक्षार्थियों की परीक्षा देने की पद्धति रही है। जांच में सामने आया कि संदिग्ध 12 अभ्यर्थी परीक्षा के शुरुआती एक घंटे तक कंप्यूटर माउस को छुए बिना चुपचाप बैठे रहे। इसके बाद अचानक सक्रिय होकर उन्होंने मात्र 15 से 30 मिनट के भीतर ही 100 कठिन प्रश्नों को हल कर दिया। हैरानी की बात यह है कि ये वही छात्र हैं, जिन्होंने पिछली पुलिस भर्ती परीक्षाओं में 50 से भी कम अंक प्राप्त किए थे, लेकिन इस बार इन्होंने 90 से अधिक अंक पाकर शत-प्रतिशत परिणाम हासिल किया। पुलिस को संदेह है कि किसी एक व्यक्ति ने परीक्षा केंद्र के भीतर से ही इन सभी की तकनीकी रूप से मदद की थी।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी और तकनीकी साक्ष्य
इस परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी मुंबई की ‘एप्टेक लिमिटेड’ नामक कंपनी को सौंपी गई थी। गौरतलब है कि यह कंपनी उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों में पहले ही काली सूची में डाली जा चुकी है और जम्मू-कश्मीर में भी इस पर पेपर लीक के गंभीर आरोप लग चुके हैं। फिलहाल एसआईटी की एक टीम भोपाल में तकनीकी साक्ष्य और डेटा एकत्र कर रही है, जबकि दूसरी टीम भिंड और मुरैना के उन 12 संदिग्ध अभ्यर्थियों की तलाश में रवाना हुई है, जिन्होंने इस फर्जीवाड़े के जरिए मेरिट में स्थान बनाया है। इस मामले में 2 मार्च को भोपाल में शून्य पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसे अब रतलाम स्थानांतरित कर दिया गया है।
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