रिश्तों की खामोश जंग में मध्यस्थता ने घोली मिठास, इशारों की भाषा से सुलझा विवाद

शाजापुर, अग्निपथ। पारिवारिक विवाद अक्सर अदालती गलियारों की धूल और आपसी कड़वाहट में दम तोड़ देते हैं, लेकिन शाजापुर में न्याय और संवेदनशीलता का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। यहाँ एक मूक-बधिर दम्पत्ति के बीच चल रहे पेचीदा पारिवारिक विवाद को न केवल सुलझाया गया, बल्कि रिश्तों की नई नींव भी रखी गई। इस मामले ने यह सिद्ध कर दिया है कि जहाँ सुलह की सच्ची इच्छाशक्ति होती है, वहाँ शारीरिक अक्षमता और मनमुटाव जैसी बाधाएं कभी न्याय का रास्ता नहीं रोक सकतीं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सांकेतिक भाषा का अनूठा प्रयोग

यह पूरी कार्यवाही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शाजापुर के तत्वावधान में वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र (एडीआर भवन) में आयोजित की गई। प्राधिकरण के अध्यक्ष आनंद कुमार तिवारी के मार्गदर्शन और सचिव नमिता बौरासी एवं डीएलएओ शिखा शर्मा के कुशल निर्देशन में इस संवेदनशील प्रकरण को मध्यस्थता के लिए चुना गया था। विवाद मुख्य रूप से आवेदक कपिल सोनलिया, उनकी पत्नी दीपिका कौरव और अनावेदक विष्णु प्रसाद सोनलिया व महेंद्र सोनलिया के बीच चल रहा था। चूंकि आवेदक पक्ष बोल पाने और सुन पाने में असमर्थ था, इसलिए संवाद की चुनौती को पार करने के लिए सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ अतुल राठौर और मध्यस्थ ज्ञानेंद्र पुरोहित की विशेष सेवाएँ ली गईं। इन विशेषज्ञों ने एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों की भावनाओं और शर्तों को एक-दूसरे तक स्पष्ट रूप से पहुँचाया।

विश्वास की बहाली और आपसी सहमति के बड़े फैसले

मध्यस्थता की इस बैठक में दोनों पक्षों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए दूरगामी निर्णय लिए। रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने की शुरुआत पिछली बैठक में ही हो गई थी, जब सहमति के आधार पर दम्पत्ति के निवास की विद्युत आपूर्ति बहाल की गई थी। इस कदम ने विश्वास का वह माहौल तैयार किया, जिसने अंतिम समझौते की राह आसान कर दी। चर्चा के दौरान भविष्य में कृषि से होने वाली आय के न्यायोचित बंटवारे पर सहमति बनी। साथ ही अनावेदक पक्ष ने उदारता दिखाते हुए आवेदक दम्पत्ति को कृषि कार्य के लिए घास काटने की मशीन उपलब्ध कराने का वादा किया। इसके अलावा सोलर पैनल से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं को भी आपसी रजामंदी से हल कर लिया गया।

मध्यस्थता: समाधान की एक नई और सुलभ राह

प्रकरण के सफल निराकरण पर प्राधिकरण की सचिव नमिता बौरासी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि शाजापुर में मध्यस्थता अब न्याय पाने की एक नई और प्रभावी दिशा बन रही है। यह मामला समाज के लिए एक मिसाल है कि कैसे आपसी संवाद और विशेषज्ञ सहयोग से जटिल से जटिल मामले भी सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटाए जा सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे लंबी, थकाऊ और खर्चीली अदालती प्रक्रिया में समय बर्बाद करने के बजाय मध्यस्थता और लोक अदालत जैसे सरल विकल्पों को अपनाएं। इससे न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि समाज में शांति और प्रेम का वातावरण भी बना रहता है।

Next Post

नारी शक्ति के अपराधी हैं विपक्षी दल, इस पाप की सजा जनता देगी: प्रधानमंत्री मोदी

Sat Apr 18 , 2026
महिला आरक्षण बिल गिरने पर पीएम ने मांगी माफी; कांग्रेस, सपा और टीएमसी पर साधा निशाना नई दिल्ली, अग्निपथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने विशेष संबोधन में महिला आरक्षण विधेयक (131वां संशोधन) के लोकसभा में पारित न हो पाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। लगभग 30 […]

Breaking News