सीहोर, अग्निपथ। सीहोर की जीवनदायिनी और आस्था का केंद्र मां सीवन नदी को उसके मूल स्वरूप में लौटाने के लिए अब जनशक्ति और प्रशासन ने हाथ मिला लिया है। ‘मैं पुत्र सीवन का, मैं पुत्री सीवन की’ अभियान के 19वें दिन हनुमान पाठक धाम पहुंचे नगर पालिका अध्यक्ष विकास प्रिंस राठौर ने नदी के पूर्ण उद्धार का भरोसा दिलाया। इस दौरान सीवन योद्धाओं के परिश्रम और नदी की स्थिति को देखकर उपस्थित वृद्ध जनों की आंखें नम हो गईं। नपाध्यक्ष ने सीवन पुत्र एवं पुत्री समिति के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए समिति को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की।
केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र, करोड़ों से होगा विकास
नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर ने सीवन के सौंदर्यीकरण और विकास को लेकर अपनी विस्तृत कार्ययोजना साझा की। उन्होंने बताया कि सीवन नदी के उद्धार के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर 30 करोड़ रुपये की मांग की गई है। इसके साथ ही संपूर्ण सीहोर के समग्र विकास के लिए 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत करवाने का प्रयास किया जा रहा है। नपाध्यक्ष ने विश्वास दिलाया कि जब तक सीवन अपने प्राचीन और निर्मल स्वरूप में नहीं आ जाती, वे सीवन योद्धाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
आस्था का केंद्र है मां सीवन
नपाध्यक्ष ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सीवन हमारे लिए केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां अपनी श्रद्धा लेकर आते हैं, इसलिए इसकी स्वच्छता और छवि को अक्षुण्ण बनाए रखना हम सभी का परम कर्तव्य है। उन्होंने जलकुंभी हटाने के कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि योद्धाओं के श्रम से निर्मित जलाशयों के कारण ही आज भीषण गर्मी में लाखों बेजुबान पक्षी और जीव-जंतु अपनी प्यास बुझा पा रहे हैं।
योद्धाओं और नन्हे सहयोगियों का हुआ सम्मान
अभियान के 19वें दिन सेवा कार्य में जुटे राजकुमार सोनी (भूरा भैया) और जल व्यवस्था संभाल रहे चंद्रशेखर राजपूत का मेडल व माला पहनाकर भावभीना स्वागत किया गया। विशेष आकर्षण का केंद्र नन्हे सीवन पुत्र और पुत्रियां रहे, जो स्वेच्छा से इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं। नपाध्यक्ष ने इन बच्चों के जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें गमछा पहनाकर सम्मानित किया। महाराष्ट्रीयन समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने भी मौके पर पहुंचकर सीवन पुत्रों का उत्साहवर्धन किया।
2026 के अंत तक पूर्ण उद्धार का लक्ष्य
समिति के प्रदीप चावड़ा ने बताया कि अभियान का एकमात्र उद्देश्य वर्ष 2026 के अंत तक मां सीवन को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त और जलकुंभी मुक्त करना है। इस अवसर पर पार्षद आशीष गहलोत, नरेंद्र राजपूत, लोकेंद्र वर्मा और समाजसेवी हेमंत दरबार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और सीवन योद्धा उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में वृद्धजनों का सम्मान किया गया, जिससे माहौल अत्यंत भावुक हो गया। सभी ने एक स्वर में सीवन को बचाने का संकल्प दोहराया।
