आस्था और राजनीति का चिंताजनक घालमेल
सुसनेर, अग्निपथ। आस्था और धार्मिक निष्ठा की प्रतीक कावड़ यात्रा इस बार सुसनेर में राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। पिछले ११ वर्षों से जो शिवशक्ति कावड़ एवं कलश यात्रा एक निष्पक्ष और एकीकृत धार्मिक आयोजन के रूप में पंचदेहरिया के लिए निकलती आ रही थी, वह अब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक शक्ति परीक्षण का अखाड़ा बन गई है। एक ही समिति के बैनर तले दो अलग-अलग तिथियों में यात्राओं का आयोजन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनसेवा और भक्ति से अधिक महत्व अब नेताओं के व्यक्तिगत वर्चस्व और राजनीतिक कद को दिया जा रहा है।
धार्मिक मंचों पर राजनीतिक वर्चस्व की जंग
आगामी २२ अगस्त को मनकामनेश्वर महादेव मंदिर से निकलने वाली पहली यात्रा को कांग्रेस का स्पष्ट समर्थन प्राप्त है, जिसमें क्षेत्रीय विधायक और पार्टी के प्रतिनिधि अपनी ताकत झोंक रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, १९ अगस्त को भाजपा समर्थित पूर्व विधायक और उनके कार्यकर्ताओं द्वारा दूसरी यात्रा निकालने की योजना बनाई गई है। ईश्वर भक्ति के पावन अवसर पर भीड़ जुटाने और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की यह होड़ सीधे तौर पर आम जनमानस की धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल है।
सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप और जनता का असमंजस
तैयारियों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर जारी आरोप-प्रत्यारोप का दौर इस कड़वाहट को और बढ़ा रहा है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद सावन माह के इस पवित्र आयोजन को ‘किसका पलड़ा भारी’ जैसे चुनावी तराजू पर तौला जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जब निष्ठा और श्रद्धा के स्थान पर ‘भीड़ तंत्र’ और ‘राजनीतिक नफा-नुकसान’ हावी होने लगे, तो ऐसी यात्राएं अपनी पवित्रता खो देती हैं। सुसनेर की जनता अब इस बात का अवलोकन कर रही है कि धर्म को राजनीति का हथियार बनाना किस हद तक जायज है।
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