सीहोर, अग्निपथ।सावन के अंतिम चरण में प्रदोष के पावन अवसर पर सीहोर से कुबेरेश्वरधाम तक आस्था, भक्ति और जनसेवा का विराट संगम देखने को मिला। शहर के सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक करीब 11 किलोमीटर लंबी भव्य कांवड़ यात्रा निकाली गई। भगवा वस्त्रों में सजे हजारों कांवड़िए कंधों पर कांवड़ लिए हर-हर महादेव, बम-बम भोले और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयघोष के साथ आगे बढ़ते रहे। रिमझिम बारिश भी शिवभक्तों के अटूट विश्वास और उत्साह को डिगा नहीं सकी। सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक फैली इस कांवड़ यात्रा में बारिश, भक्ति, सेवा और शिव नाम का ऐसा अनूठा संगम दिखा कि समूचा मार्ग शिवमय हो उठा।
कांवड़ उठाए भक्तों संग पैदल चले पंडित प्रदीप मिश्रा
कांवड़ यात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का खुद कांवड़ उठाकर श्रद्धालुओं के साथ चलना रहा। सुबह करीब सवा नौ बजे उन्होंने सीवन नदी तट पर पहुंचकर विधि-विधान से कांवड़ में जल भरा और श्रद्धालुओं के साथ पैदल कुबेरेश्वरधाम के लिए प्रस्थान किया। उनके यात्रा में शामिल होते ही कांवड़ियों का उत्साह कई गुना बढ़ गया। हजारों श्रद्धालु उनके साथ भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए कदम मिलाते चले।
बारिश की फुहारों के बीच गूंजते रहे भोलेनाथ के भजन
यात्रा शुरू होते ही आसमान से झमाझम फुहारें पड़ने लगीं, लेकिन श्रद्धालुओं के कदम नहीं ठमके। कांवड़िए बारिश में भी पूरी लय के साथ भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते रहे। किसी के कंधे पर पवित्र कांवड़ थी तो किसी के हाथ में फहराता भगवा ध्वज। पूरे मार्ग पर शिव नाम के जयकारों और भजनों की गूंज से माहौल पूरी तरह अध्यात्म के रंग में रंग गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बारिश की बूंदें भी शिवभक्तों की इस पावन यात्रा का जलाभिषेक कर रही हों। कांवड़िए कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर सीवन के पवित्र जल से भगवान कुबेरेश्वर महादेव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना करते दिखे।
मार्ग में 100 से अधिक सेवा शिविरों में भक्तों का सत्कार
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर से कुबेरेश्वरधाम तक के मार्ग पर 100 से अधिक सेवा शिविर लगाए गए। इनमें महाप्रसादी, फलाहारी खिचड़ी, नाश्ता, केले, फल, बिस्किट और शीतल पेयजल की उत्तम व्यवस्था की गई। स्थानीय निवासियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के साथ विठलेश सेवा समिति के सेवादार भी तत्परता से जुटे रहे। विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सेवादारों ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसादी संभाली। समिति के अनुसार भारी संख्या में पहुंचे कांवड़ यात्रियों को भंडारे में तृप्त कराया गया।
450 किमी पैदल चलकर भोले बाबा की झांकी लाए शिवभक्त
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि इस ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा में देश के कोने-कोने से आए प्रसिद्ध भजन गायकों ने भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। आधा दर्जन से अधिक आकर्षक झांकियां, बैंड-बाजे और भजन मंडलियां यात्रा का विशेष केंद्र रहीं। महाराष्ट्र के जलगांव से आए श्रद्धालुओं का दल भगवान भोलेनाथ की झांकी के साथ करीब 450 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करके कुबेरेश्वरधाम पहुंचा।
देश-विदेश से उमड़ा आस्था का महासैलाब
इस कांवड़ यात्रा में मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और उत्तरप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु शामिल हुए। इतना ही नहीं, विदेशों से भी कई शिवभक्त कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। अलग-अलग क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने यात्रा में सहभागी बनकर सीवन नदी के जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
प्रशासन की मुस्तैदी, सीवन घाट से पुल तक जल भरने के इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए। सीवन नदी घाट पर अत्यधिक भीड़ को देखते हुए कांवड़ियों के लिए पुल पर नलों के माध्यम से जल भरने की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरे मार्ग पर मुस्तैद रहीं, जिससे यातायात, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रही।
कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर पंडित मिश्रा ने जताया सभी का आभार
कुबेरेश्वरधाम पहुंचने के उपरांत पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा को सफल बनाने में समाज के हर वर्ग का भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने ग्रामीण व शहरी सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों का हृदय से आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि पूरे सावन माह लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के बीच चिकित्सा, पार्किंग, यातायात, भोजन, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और सीवन तट के इंतजामों को संभालने में सभी ने एकजुट होकर कार्य किया।

