पोलायकलां (शाजापुर) : मुआवजे से वंचित अन्नदाताओं में फूटा आक्रोश, ट्रैक्टर-ट्रॉली से तहसील कार्यालय पहुंचे

प्रीमियम कटौती के बाद भी नहीं मिली राहत राशि

पोलायकलां, अग्निपथ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा राशि नहीं मिलने से नाराज समीपस्थ ग्राम जरखी के सैकड़ों किसानों ने सोमवार को प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। फसल खराबे का उचित मुआवजा नहीं मिलने से आक्रोशित किसान बड़ी संख्या में अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर पोलायकलां तहसील कार्यालय पहुंचे। परिसर में एकत्र होकर किसानों ने बीमा कंपनी की वादाखिलाफी और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

तहसील परिसर में विरोध प्रदर्शन करने के पश्चात किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने पोलायकलां तहसीलदार भागीरथ जायसवाल को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से पीड़ित किसानों ने फसल बीमा योजना के अंतर्गत बकाया बीमा राशि शीघ्र जारी करवाने की गुहार लगाई। किसानों ने स्पष्ट कहा कि प्राकृतिक आपदा और प्रतिकूल मौसम के कारण उनकी फसलें पूरी तरह चौपट हो गई थीं, जिसके बाद उन्हें बीमा योजना से सहायता की उम्मीद थी।

बीमा कंपनियों की कार्यशैली पर खड़े किए गंभीर सवाल

तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते समय किसानों ने बीमा कंपनियों और बैंक प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। अन्नदाताओं का कहना था कि फसल बीमा के नाम पर उनके बैंक खातों से प्रीमियम की निर्धारित राशि समय पर काट ली गई थी। जब बैंक और बीमा कंपनी ने प्रीमियम जमा करने में कोई देरी नहीं की, तो फिर फसल खराब होने के बावजूद पात्र किसानों को बीमा राशि के लाभ से वंचित क्यों रखा जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि नुकसान के बाद भी उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर किया जा रहा है।

प्रशासनिक जांच और शीघ्र भुगतान की रखी मांग

प्रदर्शनकारी किसानों ने शासन और स्थानीय प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि बीमा कंपनी द्वारा किए गए सर्वे और कागजी कार्रवाई की समीक्षा की जाए, ताकि वास्तविक रूप से पीड़ित और पात्र किसानों को जल्द से जल्द उनकी फसल बीमा की राशि दिलाई जा सके। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया और मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र के सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।

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