बारिश में उखड़ीं सड़कें, जगह-जगह बने जानलेवा गड्ढे
धार, अग्निपथ। मानसून की तेज बारिश ने शहर की सड़कों पर हुए विकास कार्यों की हकीकत उजागर कर दी है। हालात ऐसे हैं कि अब लोगों के बीच यही सवाल गूंज रहा है—सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क? शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अधिकांश प्रमुख मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। कहीं डामर पूरी तरह उखड़ चुका है तो कहीं सड़क की परत बह गई है।
बारिश के बाद मुख्य मार्ग, कॉलोनियों के रास्ते और ग्रामीण संपर्क सड़कें पूरी तरह बदहाल नजर आ रही हैं। दोपहिया वाहन चालक गड्ढों में फिसल रहे हैं, जबकि चार पहिया वाहनों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर जलभराव के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे हादसों की आशंका अत्यधिक बढ़ गई है। बारिश ने इस बार सिर्फ सड़कों की पोल नहीं खोली, बल्कि नगर पालिका के विकास के दावों को भी गड्ढों में उतार दिया है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि बारिश हर साल आती है, सड़कें हर साल टूटती हैं, शिकायतें होती हैं और केवल खोखले आश्वासन मिलते हैं।
एक दर्जन से अधिक कॉलोनियों के रास्ते जर्जर
शहर की करीब एक दर्जन कॉलोनियों की सड़कें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि अब पैदल चलना भी जोखिम से भरा काम बन गया है। दोपहिया वाहन चालक हर मोड़ पर हादसे की आशंका के साथ सफर करने को मजबूर हैं। शहर की कॉलोनियों में नई सड़क निर्माण की मांग वर्षों से उठ रही है। रहवासी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके हैं, और अब बारिश ने उन अधूरे वादों को कीचड़ में तब्दील कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग गड्ढों से भरी सड़कों के वीडियो और फोटो साझा कर नगर पालिका को जमकर घेर रहे हैं। विकास के दावों पर सवाल उठ रहे हैं और जिम्मेदारों की कार्यशैली पर तीखे तंज कसे जा रहे हैं।
करोड़ों खर्च, फिर भी सड़कें दे गईं जवाब
हर साल सड़क निर्माण और मरम्मत पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में सड़कें उखड़ जाना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि निर्माण मानकों के अनुसार हुआ होता तो इतनी जल्दी सड़कें खराब नहीं होतीं। खराब सड़कों के कारण यातायात की रफ्तार धीमी हो गई है और विभिन्न क्षेत्रों में जाम की स्थिति बन रही है। पैदल चलने वालों को भी गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है।
जानलेवा बने पानी से भरे गड्ढे
बारिश के दौरान पानी से भरे गड्ढे वाहन चालकों को नजर नहीं आते। अचानक गड्ढे में वाहन जाने से संतुलन बिगड़ जाता है और दुर्घटना हो जाती है। खासकर रात के समय स्थिति और भी विकराल हो जाती है। ऐसे में केवल खानापूर्ति के लिए गड्ढे भरना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि खराब निर्माण की जांच कर जिम्मेदार एजेंसियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। जब तक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सख्ती नहीं होगी, हर मानसून में यही सवाल उठता रहेगा।
बदहाली पर गरमाई राजनीति
शहर की बदहाल सड़कों का मुद्दा अब राजनीतिक रंग पकड़ने लगा है। उखड़ी सड़कें, जलभराव और गड्ढों से परेशान नागरिकों की आवाज अब विपक्ष ने भी उठाई है। युवक कांग्रेस ने मांडू रोड स्थित दौलतनगर सड़क निर्माण को लेकर नगर पालिका को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका केवल कागजी मरम्मत दिखाकर अपनी नाकामी छिपाने का प्रयास कर रही है।
कॉलोनियों में नारकीय बने हालात
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दौलतनगर की सड़क बनी कीचड़ का रास्ता: मांडू रोड स्थित दौलतनगर कॉलोनी का मुख्य मार्ग सबसे ज्यादा खराब स्थिति में है। ढलान होने के कारण बारिश का पानी सड़क पर जमा हो जाता है, जिससे रास्ता गहरे गड्ढों में बदल जाता है। वाहन गुजरने पर राहगीरों पर कीचड़ उछलता है। रहवासियों की मांग फाइलों से आगे नहीं बढ़ सकी है।
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क्वींस पार्क-इंद्रपुरी मार्ग पर बढ़ता खतरा: क्वींस पार्क और इंद्रपुरी कॉलोनी को जोड़ने वाला मार्ग बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। हल्की बारिश में ही जलभराव होने से गड्ढे छिप जाते हैं। दोपहिया चालकों के फिसलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
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चाणक्यपुरी और दीनदयालपुरम में केवल चुनावी वादे: इन कॉलोनियों के रहवासियों का कहना है कि हर चुनाव में सड़क निर्माण के वादे किए जाते हैं, जो बाद में गायब हो जाते हैं। कई सड़कें आज भी कच्ची हैं। टैक्स वसूली में आगे रहने वाली नगर पालिका सुविधाएं देने के नाम पर नियम और प्रक्रियाओं का हवाला देती है।

