उज्जैन नगर निगम का हाई वोल्टेज ड्रामा: अधिनियम पास होने के बाद ‘धारा-30’ पर भिड़े पक्ष-विपक्ष

उज्जैन, अग्निपथ। नगर निगम मुख्यालय के सभाकक्ष में शुक्रवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आहूत विशेष सम्मेलन हंगामे की भेंट चढ़ गया। वैसे तो सदन में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए सभी पार्षद एकजुट नजर आ रहे थे, लेकिन अंत में कानूनी धाराओं के फेर और राजनीतिक श्रेय की जंग ने सदन को अखाड़े में तब्दील कर दिया। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि कांग्रेस पार्षदों ने “जय भीम” के नारे लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

विशेष सम्मेलन के कानूनी स्वरूप पर बवाल

विशेष सम्मेलन की शुरुआत शांतिपूर्ण रही, लेकिन सदन समाप्त होने के कुछ समय पहले नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने एक बड़ा तकनीकी मुद्दा उठाकर सनसनी फैला दी। उन्होंने तर्क दिया कि नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 की धारा-30 के तहत जो विशेष सम्मेलन बुलाया गया है, उसकी प्रक्रिया ही गलत है। नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि धारा-30 के अंतर्गत सम्मेलन बुलाने के लिए कम से कम 18 पार्षदों का लिखित सहमति पत्र सभापति को प्रेषित करना अनिवार्य होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 18 पार्षदों ने लिखकर इसकी मांग की थी? उन्होंने अधिकारियों पर गलत पत्र प्रेषित करने का आरोप लगाते हुए सदन की वैधानिकता पर सवाल खड़े कर दिए।

सर्वानुमति से पारित हुआ आभार प्रस्ताव

हंगामे से पहले, महापौर मुकेश टटवाल ने सदन के समक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव का वाचन किया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए उन्होंने समस्त पार्षदों की ओर से आभार व्यक्त किया। शुरुआती दौर में कांग्रेस के पार्षदों ने भी इस अधिनियम का समर्थन किया और प्रस्ताव सर्वानुमति से पारित हो गया।

आरक्षण के भीतर आरक्षण और ओबीसी का मुद्दा

चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद सुलेखा ने अधिनियम की खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसमें ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सभी वर्गों की महिलाओं को समान रूप से मिलना चाहिए। उन्होंने देश में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ रहे अपराधों और बलात्कार की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की, जिसका भाजपा पार्षदों ने कड़ा विरोध किया। वहीं, पार्षद प्रेमलता रामी ने सावित्री बाई फुले की प्रतिमा लगाने की मांग करते हुए अपना पूरक प्रस्ताव दोहराया।

राजनीतिक इतिहास और श्रेय की जंग

सदन में कांग्रेस और भाजपा के बीच श्रेय लेने की होड़ भी दिखाई दी। कांग्रेस पार्षद गब्बर कुंवाल ने याद दिलाया कि राजीव गांधी ने 2010 में ही राज्यसभा में आरक्षण का मुद्दा रखा था और पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण कांग्रेस ने ही लागू किया। इसके जवाब में भाजपा पार्षद सत्यनारायण चौहान ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के 76 वर्षों के शासनकाल में महिलाओं के लिए वास्तविक आरक्षण कभी जमीन पर नहीं उतरा। चर्चा में आसिमा सेंगर, निर्मला परमार और राखी कड़ैल ने भी अपने विचार रखे।

देवी अहिल्याबाई और नारी शक्ति का स्मरण

कांग्रेस की माया राजेश त्रिवेदी ने आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि हमारे देवी पुराण में नारी को ही ब्रह्मा, विष्णु और शिव स्वरूप माना गया है। उन्होंने उज्जैन से लेकर उत्तराखंड तक 12 ज्योतिर्लिंगों के जीर्णोद्धार में देवी अहिल्याबाई होलकर के योगदान का स्मरण कराया। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सभी को एकजुट होना चाहिए। चर्चा के दौरान जब पार्षद हेमंत गेहलोत ने टोकना शुरू किया, तो नेता प्रतिपक्ष ने तीखे लहजे में कहा कि कम से कम कालूहेड़ा जी का सम्मान तो कर लीजिए। माया त्रिवेदी ने पार्षद दिलीप परमार पर हमला बोलते हुए पुराने राजनीतिक संस्मरण साझा किए और पार्षद अर्पित दुबे की ओबीसी आरक्षण संबंधी टिप्पणी पर भी बहस हुई।

बाबा साहेब अंबेडकर पर भिड़े दोनों दल

विवाद का मुख्य केंद्र एमआईसी सदस्य शिवेंद्र तिवारी का संबोधन बना। जब उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर और आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा सरकार के प्रयासों की बात की, तो नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि डॉ. अंबेडकर कांग्रेस के थे। इस पर शिवेंद्र तिवारी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने ही बाबा साहेब को दो बार लोकसभा चुनाव हरवाया और उनका अपमान किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने ही बाबा साहेब से जुड़े स्थलों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित किया और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने में भूमिका निभाई।

सभापति की चेतावनी और कांग्रेस का वॉकआउट

हंगामे के बीच निगम सभापति ने नेता प्रतिपक्ष रवि राय के धारा-30 वाले बयान को गलत बताते हुए उन्हें चेतावनी दी। सभापति ने कहा कि अधिनियम की धाराओं की गलत व्याख्या करना उचित नहीं है और सम्मेलन पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत बुलाया गया है। सचिव शैलेंद्र सिंह ने भी स्पष्ट किया कि नगर निगम और नगर पालिका दोनों के लिए विशेष सम्मेलन के आदेश विधिवत जारी किए गए थे। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद अपनी मांग पर अड़े रहे और अंततः नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए। सदन में काफी समय तक गहमागहमी बनी रही और अंत में सम्मेलन को समाप्त घोषित किया गया।

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