सीहोर, अग्निपथ। सीहोर के समीप स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ कुबेरेश्वर धाम में बुधवार को भक्ति और श्रद्धा का एक नया अध्याय लिखा गया। काठमांडू स्थापत्य शैली में निर्मित भव्य मुरली मनोहर मंदिर में भगवान शिव-पार्वती, भगवान राम-सीता और भगवान मुरली मनोहर की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस ऐतिहासिक अवसर पर भगवान के दर्शन के लिए मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों सहित देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत जब संध्या आरती हुई, तो अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
स्वर्ण आभूषणों से महका प्रभु का दरबार
अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस पांच दिवसीय अनुष्ठान का समापन भव्यता के साथ हुआ। स्वयं पंडित श्री मिश्रा 25 अप्रैल से बुधवार तक निरंतर पूजन प्रक्रिया में सम्मिलित रहे और प्रत्येक विधान को विधिवत संपन्न कराया। बुधवार सुबह भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित प्रतिमाएं भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहीं। पूरा मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पंडित समीर शुक्ला और पंडित विनय मिश्रा सहित अनेक विद्वान विप्रजनों ने सवा लाख से अधिक मंत्रों के साथ आहुतियां पूर्ण कीं।
एक ही स्थान पर सतयुग से कलियुग तक का मिलन
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने इस मंदिर की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुबेरेश्वर धाम की यह पवित्र भूमि भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों के मध्य स्थित है, जहाँ भक्त ‘कंकर को शंकर’ मानकर पूजते हैं। उन्होंने बताया कि यह संभवतः देश का पहला ऐसा मंदिर है जहाँ एक साथ तीन युगों की झलक मिलती है। यहाँ महादेव (सतयुग), मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम (त्रेतायुग) और भगवान श्री कृष्ण (द्वापरयुग) एक साथ विराजमान हैं। कलियुग के इस दौर में इन तीनों स्वरूपों का एक ही स्थान पर दर्शन मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
निर्मल मन से ही संभव है ईश्वर की प्राप्ति
प्रेस वार्ता और प्रवचन के दौरान पंडित श्री मिश्रा ने सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि कलियुग में कथा और सत्संग अमृत के समान हैं। जब धरती पर पाप और अधर्म बढ़ता है, तब भगवान धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान की लीला को समझने के लिए बुद्धि नहीं, बल्कि मन की निर्मलता आवश्यक है। जब तक मनुष्य का हृदय शुद्ध नहीं होता, तब तक कठिन प्रयासों के बाद भी ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है। भक्ति और विश्वास के साथ की गई कामना कुबेर भंडारी के दरबार में अवश्य पूर्ण होती है।
सेवा और व्यवस्थाओं का अनूठा उदाहरण
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन पर समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यापक प्रबंध किए गए थे। मंदिर आने वाले भक्तों को प्रसादी का वितरण किया गया और भीषण गर्मी को देखते हुए शीतल पेयजल की निशुल्क व्यवस्था की गई। अब यह मंदिर नियमित रूप से दर्शनार्थियों के लिए खुला रहेगा। चारों युगों के प्रतीक देवताओं के एक साथ दर्शन सुलभ होने से कुबेरेश्वर धाम अब न केवल शिव भक्तों के लिए, बल्कि राम और कृष्ण के उपासकों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है।
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