तराना में बिजली संकट पर फूटा गुस्सा: दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे रहवासी

तराना, अग्निपथ। नगर की बजरंग कॉलोनी में बिजली की लगातार अनियमितता और बार-बार होने वाले फॉल्ट से त्रस्त होकर रहवासियों के सब्र का बांध बुधवार को टूट गया। भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली गुल रहने से नाराज लोग सुबह ही विद्युत विभाग के कार्यालय पहुंच गए और मुख्य दरवाजे पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखकर विभाग में हड़कंप मच गया। रहवासियों का साफ कहना है कि अघोषित बिजली कटौती और वोल्टेज के उतार-चढ़ाव ने उनका जीना मुहाल कर दिया है, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।

उपकरण जल रहे और जनता झेल रही आर्थिक मार

धरने पर बैठे रहवासियों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बार-बार होने वाले फॉल्ट और लो-वोल्टेज के कारण घरों के कीमती विद्युत उपकरण जल रहे हैं। इससे लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें देने के बाद भी समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। स्थानीय लोगों ने तल्ख लहजे में कहा कि एक तरफ तेज गर्मी की मार है और दूसरी तरफ बिजली की आंख-मिचौली, ऐसे में आम आदमी जाए तो कहां जाए।

अधिकारियों का ‘अप-डाउन’ बना मुसीबत की जड़

प्रदर्शन के दौरान विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा खुलासा भी सामने आया। रहवासियों ने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग के कई जिम्मेदार अधिकारी तराना में पदस्थ होने के बाद भी मुख्यालय पर नहीं ठहरते हैं। वे उज्जैन से रोजाना ‘अप-डाउन’ करते हैं, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर होने वाली छोटी-छोटी समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं हो पाता। अधिकारियों की अनुपस्थिति में लाइनमैन और अन्य कर्मचारी भी मनमानी करते हैं। रहवासियों का तर्क है कि यदि अधिकारी मुख्यालय पर नियमित रूप से मौजूद रहें, तो फॉल्ट जैसी समस्याओं को घंटों तक खींचने की जरूरत ही न पड़े।

आश्वासन के भरोसे रहवासी, अन्य क्षेत्रों में भी हाहाकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे वार्डवासियों को समझाइश दी। अधिकारियों ने जल्द ही व्यवस्था सुधारने और फॉल्ट की समस्या को खत्म करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया। हालांकि, बिजली की यह समस्या केवल बजरंग कॉलोनी तक सीमित नहीं है। नगर के अन्य कई वार्डों से भी कम वोल्टेज और घंटों बिजली गुल रहने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। अब देखना यह है कि विभाग अपने दिए गए आश्वासन पर कितना खरा उतरता है या फिर जनता को दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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