जिला अस्पताल में 20 मिनट गुल रही बिजली, मोबाइल की टॉर्च में हुआ मरीजों का इलाज

उज्जैन, अग्निपथ। उज्जैन जिला अस्पताल में शनिवार सुबह अचानक बिजली गुल होने से हड़कंप मच गया। करीब 20 मिनट तक बिजली बंद रहने के कारण डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों का उपचार करना पड़ा। बिजली जाते ही इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, वहीं वार्ड और आईसीयू में भर्ती मरीज गर्मी और घुटन से बेहाल हो उठे।

इमरजेंसी में टॉर्च जलाकर की गई मरीजों की ड्रेसिंग

घटना सुबह करीब 9 बजे की है, जब अचानक पूरे अस्पताल की बिजली चली गई। अस्पताल के कई कमरों में वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण वहां अंधेरा छा गया। उस समय इमरजेंसी वार्ड में 2-3 मरीजों की ड्रेसिंग चल रही थी। डॉक्टर न तो बीच में ड्रेसिंग छोड़ सकते थे और न ही मरीजों को इंतजार करने के लिए कह सकते थे, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि बिजली कब लौटेगी। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों और स्टाफ ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर ही इलाज जारी रखा।

मरीजों और परिजनों ने बयां किया अपना दर्द

मरीज के परिजन इशफाक खान ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद उनके भतीजे को रात में भर्ती कराया गया था। सुबह बिजली जाने पर वार्ड में भीषण गर्मी के कारण मरीज घबराने लगा। अगर बिजली जल्दी नहीं आती तो स्थिति और बिगड़ सकती थी। वहीं उन्हेल से आए श्रीनिवास शर्मा ने बताया कि गर्मी के कारण वे सुबह जल्दी अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन बिजली जाने से पंखे बंद हो गए और उन्हें बेटे के साथ पेड़ के नीचे बैठकर इंतजार करना पड़ा। तीसरी मंजिल पर भर्ती जाहिद खान ने बताया कि लिफ्ट अक्सर खराब रहती है और बिजली जाने पर उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसके कारण वे खुद ही पैदल नीचे उतरकर आ गए।

500 बेड के अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

उज्जैन का यह जिला अस्पताल 500 बेड की क्षमता वाला प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज निर्माण के चलते इसे चरक अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। यहां रोजाना 300 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

लिफ्ट खराब और बैकअप सिस्टम भी फेल

अस्पताल में बिजली कटौती की समस्या अब आम हो गई है। इसके साथ ही लिफ्ट का मेंटेनेंस भी ठीक से नहीं हो रहा है। बताया जाता है कि ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन के बीच विवाद के चलते लिफ्ट की स्थिति दयनीय है। बिजली जाने पर बैकअप सिस्टम काम नहीं करता, जिससे कई बार लोग लिफ्ट में भी फंस चुके हैं।

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