धार, अग्निपथ। धार जिले के जनजातीय कार्य विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब सरकारी खजाने की राशि में बड़ी हेराफेरी और वित्तीय अनियमितता का काला चिट्ठा खुलकर सामने आ गया। कलेक्टर और कोषालय की जांच रिपोर्ट के बाद विभाग ने एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लेते हुए चार शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इन शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने करोड़ों रुपये की सरकारी राशि जो गलती से उनके खातों में आई थी, उसे ईमानदारी से लौटाने के बजाय डकार लिया और अपने व्यक्तिगत ऐशो-आराम और परिजनों के खातों में खपा दिया। 12 मार्च 2026 को सहायक आयुक्त द्वारा जारी इस आदेश ने पूरे शिक्षा जगत में खलबली मचा दी है।
सरकारी खजाने पर डाका और शिक्षकों की ‘मौज’
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान वेतन एरियर्स, कार्यालय के खर्चे, ई-चालान और अवकाश नगदीकरण जैसी महत्वपूर्ण राशियों को असल हकदारों तक पहुँचना था, लेकिन तकनीकी चूक या मिलीभगत के चलते यह भारी-भरकम राशि इन चार शिक्षकों के बैंक खातों में जा गिरी। कायदे से इन शिक्षकों को तुरंत बैंक या विभाग को सूचना देनी चाहिए थी, लेकिन इन्होंने इसे ‘ऊपर की कमाई’ समझकर दबा लिया। महीनों तक सरकारी पैसे का व्यक्तिगत उपयोग किया गया और विभाग को कानों-कान खबर तक नहीं होने दी गई।
18 लाख की राशि डकारने वाली शिक्षिका पर गिरी गाज
इस पूरे कांड में सबसे बड़ा नाम शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका प्रारू रावत का सामने आया है। डही विकासखंड के ग्राम बड़दा में पदस्थ इस शिक्षिका के खाते में एक-दो हजार नहीं, बल्कि पूरे 18 लाख 81 हजार 620 रुपये की भारी राशि जमा हुई थी। यह पैसा वेतन एरियर्स और कार्यालय व्यय के नाम पर आया था। शिक्षिका ने इस मोटी रकम को चुपचाप अपने और अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर लिया। जब विभाग ने जांच शुरू की और गर्दन फंसती दिखी, तब जाकर यह राशि लौटाई गई। शासन ने इसे सीधे तौर पर वित्तीय हानि पहुँचाने का प्रयास और गंभीर धोखाधड़ी माना है।
गाजगोटा और अराड़ा के शिक्षकों ने भी किया खेल
भ्रष्टाचार की यह जड़ें सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं थीं। ग्राम गाजगोटा के शिक्षक प्रताप सिंह भिड़े के खाते में भी 14 लाख 90 हजार रुपये की सरकारी राशि ट्रांसफर हुई थी। भिड़े ने भी नैतिकता को ताक पर रखकर इस राशि का धड़ल्ले से उपयोग किया। इसी तरह ग्राम अराड़ा के दो अन्य शिक्षक भूर सिंह रावत और अशोक कुमार चौंगड़ के खातों में भी क्रमशः 4 लाख 3 हजार और 4 लाख 5 हजार रुपये से अधिक की राशि जमा हुई थी। इन सभी ने एक ही तरीका अपनाया; न विभाग को बताया और न ही बैंक को कोई सूचना दी।
गबन की श्रेणी में मामला: अब होगी कड़ी विभागीय जांच
सहायक आयुक्त द्वारा जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन शिक्षकों का कृत्य केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गबन की श्रेणी में आता है। अनधिकृत रूप से सरकारी धन का उपयोग करना और जांच शुरू होने पर उसे वापस जमा करना यह साबित करता है कि इनकी मंशा साफ नहीं थी। शासन को वित्तीय क्षति पहुँचाने के इस प्रयास को बेहद गंभीरता से लिया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान इन सभी शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों से हटाकर अलग-अलग दुर्गम क्षेत्रों में अटैच कर दिया गया है। विभाग अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी राशि बार-बार गलत खातों में कैसे जाती रही और इसके पीछे विभाग के किन बाबूओं का हाथ है।
