नियमों की धज्जियां उड़ाती “साहब” की सवारी: बिना नंबर की गाड़ी और पद का अहंकार

खरगोन, अग्निपथ। शहर में कानून का पाठ पढ़ाने वाले ही जब नियमों को पैरों तले कुचलने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। खरगोन की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसी गाड़ी दौड़ रही है जिस पर “अपर कलेक्टर” की तख्ती तो बड़े गर्व से चमक रही है, लेकिन उस पर अनिवार्य आरटीओ रजिस्ट्रेशन नंबर नदारद है। यह कोई पहली बार नहीं है जब प्रशासनिक गलियारों से ऐसी लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले भी अपर कलेक्टर के पास मौजूद दूसरी कंपनी की गाड़ी बिना किसी वैध नंबर के सड़कों पर फर्राटा भर रही थी। उस समय भी “अग्निपथ” ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन पद के नशे में चूर आला अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया। अब फिर से वही स्थिति दोहराई जा रही है, जो सीधे तौर पर प्रशासन की मनमानी को उजागर करती है।

नंबर प्लेट गायब पर रसूख बरकरार

ताजा तस्वीरों में यह साफ देखा जा सकता है कि गाड़ी पर पदनाम की पट्टी तो लगी है, लेकिन नंबर प्लेट संदिग्ध और रिक्त है। गाड़ी पर लगी लाल-पीली पट्टी और सायरन इसे एक रसूखदार ‘अधिकारिक’ लुक तो दे रहे हैं, लेकिन क्या बिना रजिस्ट्रेशन के सरकारी गाड़ी चलाना वैध है? जब मूल नियमों और मोटर व्हीकल एक्ट की सरेआम अनदेखी की जा रही हो, तो इसे “पद के पावर” का खुला दुरुपयोग ही कहा जाएगा। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला है बल्कि आम जनता के मन में व्यवस्था के प्रति आक्रोश पैदा करने वाला है।

आम जनता के लिए नियम, साहब के लिए छूट

शहर के स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि कोई आम नागरिक बिना रजिस्ट्रेशन या बिना नंबर प्लेट की गाड़ी लेकर सड़क पर निकल जाए, तो पुलिस प्रशासन तत्काल चालान काटकर कार्रवाई की घुड़की देने लगता है। कई बार तो गाड़ियां जब्त तक कर ली जाती हैं। लेकिन जब बारी प्रशासनिक पद पर बैठे रसूखदारों की आती है, तो कानून की आंखों पर पट्टी बंध जाती है। क्या प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां नियमों के दायरे से बाहर हैं? यह विडंबना ही है कि जो अधिकारी जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के जिम्मेदार हैं, वही इसे ठेंगा दिखा रहे हैं।

मौन प्रशासन और सुलगते सवाल

इस पूरे मामले पर संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी तक चुप्पी साध रखी है। इस खामोशी से यही संकेत मिलता है कि या तो उन्हें कानून का डर नहीं है या फिर वे खुद को जनता से ऊपर समझते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या नियम सिर्फ गरीबों और आम जनता की जेब ढीली करने के लिए बनाए गए हैं? “अग्निपथ” इस मुद्दे पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए मांग करता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और बिना रजिस्ट्रेशन गाड़ी चलाने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। कानून की नजर में सब बराबर होने चाहिए, चाहे वह आम आदमी हो या फिर अपर कलेक्टर की कुर्सी पर बैठा कोई अधिकारी।

Breaking News