नलखेड़ा, अग्निपथ। विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। मंदिर परिसर में हवन-पूजन संपन्न कराने वाले अपंजीकृत पंडितों ने अपने पंजीयन की मांग को लेकर बुधवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ कर दिया है। प्रदर्शनकारी पंडितों का कहना है कि वे लंबे समय से शासन और प्रशासन से पंजीयन की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इस स्थिति में उनके पास लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं रह गया है।
अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का संकल्प
धरने पर बैठे पंडितों ने स्पष्ट किया कि वे सभी नलखेड़ा तहसील क्षेत्र के स्थानीय निवासी हैं। उनका कहना है कि ब्राह्मण समाज का पारंपरिक धर्म और कर्म केवल पंडिताई करना ही है। वर्तमान में मंदिर प्रबंध समिति द्वारा पंजीयन न किए जाने के कारण उन्हें हवन और पूजन कार्य संपन्न कराने में अनेक तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पंडितों ने कड़े स्वर में कहा कि वे अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब तक उनकी मांगों को विधिवत स्वीकार नहीं किया जाता, उनका यह धरना निरंतर जारी रहेगा।
प्रशासन के आश्वासन को पंडितों ने नकारा
पंडितों के विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मां बगलामुखी मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं एडीएम कमल मंडलोई के साथ सचिव व तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से विस्तारपूर्वक चर्चा की और उन्हें विश्वास दिलाया कि मंदिर समिति के नियमों के दायरे में रहकर सभी पात्र पंडितों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। हालांकि, मंदिर प्रशासन के इस आश्वासन का आंदोलनकारियों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। पंडितों ने मौखिक आश्वासन को नाकाफी बताते हुए अपना धरना समाप्त करने से साफ इनकार कर दिया।
राजनीति का अखाड़ा बनता प्रसिद्ध शक्तिपीठ
दुर्भाग्यवश, आध्यात्मिक शांति का केंद्र रहने वाला यह मंदिर इन दिनों धरना-प्रदर्शन और राजनीति का केंद्र बनता जा रहा है। ज्ञात हो कि इससे पूर्व 9 जनवरी को भी पंजीकृत पंडितों ने तत्कालीन एसडीएम सर्वेश यादव को हटाने की मांग को लेकर मंदिर परिसर में जमकर नारेबाजी की थी। उस घटना के महज तीन माह पश्चात अब अपंजीकृत पंडितों का यह मोर्चा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। बार-बार होने वाले इन घटनाक्रमों से मंदिर की गरिमा प्रभावित हो रही है।
प्रबंध समिति की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
मंदिर में आए दिन होने वाले हंगामे और धरने को लेकर स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भारी रोष व्याप्त है। आरोप है कि मां बगलामुखी प्रबंध समिति इस पूरे प्रकरण में मूकदर्शक बनी हुई है। समिति की शिथिलता और ठोस निर्णय लेने में अक्षमता के कारण दूर-दराज से आने वाले दर्शनार्थियों के बीच नगर और मंदिर की छवि धूमिल हो रही है। यदि प्रबंध समिति ने समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में यह विवाद और अधिक गहरा सकता है।
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