शाजापुर, अग्निपथ। खुशियों के माहौल के बीच उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक हंसते-खेलते परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शाजापुर जिले के ग्राम मोहना में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ पानी भरने गए 30 वर्षीय युवक की कुएं में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। जिस घर में शादी की शहनाइयां गूंजने वाली थीं, वहां अब मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है।
पैर फिसलने से कुएं में गिरा युवक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मोहना निवासी पंकज पिता बंशीलाल रविवार सुबह करीब 11 बजे घर के उपयोग के लिए पास ही स्थित एक कुएं पर पानी भरने गया था। पानी निकालते समय अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सीधे गहरे कुएं में जा गिरा। बताया जा रहा है कि पंकज को तैरना नहीं आता था, जिसके कारण वह गहरे पानी में खुद को संभाल नहीं पाया और डूबने लगा।
अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर ग्रामीणों और परिजनों की भारी भीड़ जमा हो गई। आनन-फानन में ग्रामीणों की मदद से पंकज को कुएं से बाहर निकाला गया। उस समय उसकी हालत बेहद गंभीर थी। परिजन उसे तुरंत मोहन बड़ोदिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए। यहाँ प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल शाजापुर रेफर कर दिया। दुर्भाग्यवश, जिला अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत पंकज को मृत घोषित कर दिया।
शादी की खुशियां मातम में बदलीं
इस हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि मृतक पंकज के मामा की लड़की की शादी का कार्यक्रम था, जिसमें शामिल होने के लिए परिवार के अधिकांश सदस्य गए हुए थे। पंकज घर पर ही था और घरेलू कार्य के लिए पानी भरने गया था, तभी यह हादसा हो गया। जैसे ही शादी के समारोह में पंकज की मौत की खबर पहुँची, खुशियों का माहौल गम में बदल गया और परिजन बदहवास होकर अस्पताल की ओर दौड़े।
दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मृतक पंकज पेशे से मिस्त्री का काम करता था और अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। वह कड़ी मेहनत कर अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों का भरण-पोषण कर रहा था। उसके असामयिक निधन से पत्नी और बच्चों के सिर से संरक्षक का साया हमेशा के लिए उठ गया है। रविवार को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। इस हृदय विदारक घटना से पूरे ग्राम मोहना में शोक की लहर व्याप्त है और हर कोई पीड़ित परिवार को ढांढस बंधा रहा है।
