स्वच्छता सर्वेक्षण: धार में ‘चार दिन की चांदनी’ जैसी तैयारियों के बीच टॉप-5 का लक्ष्य

धार, अग्निपथ। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की टूल किट जारी होते ही धार नगर पालिका एक बार फिर जाग गई है। शहर भर में साफ-सफाई का दौर तेजी से शुरू हो गया है, लेकिन जनता के मन में एक ही सवाल है कि क्या यह सुधार स्थायी होगा? शहर में यह कहावत चरितार्थ होती दिख रही है कि “चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात।” टीम के आने के समय तो अधिकारी और कर्मचारी पूरी ताकत झोंक देते हैं, लेकिन सर्वे खत्म होते ही शहर फिर उसी पुराने ढर्रे पर लौट आता है, जहां जगह-जगह कचरा और धूल ही नजर आती है। यदि साल भर वेतन लेने वाले जिम्मेदार अपनी ईमानदारी से काम करें, तो टीम के आने से पहले इतनी मशक्कत की जरूरत ही न पड़े।

पुराने ढर्रे पर व्यवस्था और संसाधनों की कमी

नगर पालिका इस बार धार को देश के टॉप-5 शहरों में लाने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे को चुनौती दे रही है। शहर के करीब 30 वार्डों में कचरा संग्रहण वाहन समय पर नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे परेशान होकर नागरिक सड़कों पर ही कचरा फेंकने को मजबूर हैं। दिखावे के नाम पर कई स्थानों पर केवल डिवाइडरों का रंग-रोगन कर औपचारिकता पूरी की जा रही है। वर्तमान में नगर पालिका के पास 370 सफाई कर्मचारी, 19 दरोगा और 25 कचरा वाहन हैं, जो प्रतिदिन निकलने वाले 40 टन कचरे के प्रबंधन के लिए पर्याप्त नजर नहीं आ रहे हैं। सर्वेक्षण से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और ओडीएफ प्लस-प्लस टीम का दौरा भी इसी महीने संभावित है, ऐसे में नपा के पास समय बहुत कम बचा है।

इस बार 12,500 अंकों की कड़ी परीक्षा

धार का स्वच्छता सफर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। कभी प्रदेश में अव्वल रहने वाला यह शहर पिछले सर्वेक्षण में फिसलकर 46वें स्थान पर पहुंच गया था। इस बार की चुनौती और भी कठिन है क्योंकि सर्वेक्षण का दायरा 9,500 अंकों से बढ़ाकर 12,500 अंक कर दिया गया है। मूल्यांकन को भी 3 के बजाय 11 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, विजिबल क्लीनलीनेस और एडवोकेसी फार स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष अंक रखे गए हैं।

सर्वेक्षण के प्रमुख मानक और अंक विभाजन:

  • ओडीएफ प्लस-प्लस और जीएफसी: 2,500 अंक

  • सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट: 1,500 अंक

  • विजिबल क्लीनलीनेस (दिखने वाली सफाई): 1,500 अंक

  • एडवोकेसी फार स्वच्छता: 1,500 अंक

  • एक्सेस टू सेनिटेशन और यूज्ड वाटर मैनेजमेंट: 1,000 – 1,000 अंक

  • सेग्रीगेशन और ट्रांसपोर्टेशन: 1,000 अंक

  • सिटीजन फीडबैक और अन्य: 1,500 अंक

पिछली रैंकिंग से सबक और भविष्य की राह

पिछले वर्ष पब्लिक फीडबैक में 47वीं रैंक मिलने के बाद इस बार नगर पालिका का अमला अवकाश के दिनों में भी सक्रिय दिखाई दे रहा है। ट्रेचिंग ग्राउंड, जो एक माह पहले कचरे के ढेर से अटा पड़ा था, उसे अब साफ-सुथरा मैदान बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, धार को वास्तव में स्वच्छ बनाने के लिए केवल कागजी तैयारी नहीं, बल्कि कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। इसमें ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे का वैज्ञानिक निपटान, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, तालाबों के किनारों से गंदगी हटाना और चौराहों पर टूटे डस्टबिन को बदलना अनिवार्य है। इस वर्ष की थीम “स्वच्छता की नई पहल, बढ़ाएं हाथ करें सफाई” तभी सफल होगी जब इसमें प्रशासन के साथ आम जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए।

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