रूनिजा(बडऩगर), अग्निपथ। कोरोना की तीसरी लहर खत्म होने तक प्रदेश में स्कूल शुरू न करने की मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद यह तय है कि ऑनलाइन पढ़ाई भी होने लगेगी। ऐसे में यहां के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य और शिक्षकों की कमी इसमें रोढ़ा बनेगी। इसके सहित स्कूल में कई और समस्याएं भी हैं जिनसे विद्यालय में आकर पढ़ाई शुरू होने के बाद भी छात्र-छात्राओं को रूबरू होना पड़ेगा।
वैश्विक महामारी कोरोना के बीच नया शिक्षा सत्र 1 जून से प्रारंभ हो गया है। नए सत्र के लिए बच्चों ने प्रवेश लेना भी शुरू कर दिया है। पहले 15 जून से 30 जून तक नए छात्रों को प्रवेश देने के लिए समय निर्धारित किया था। बाद में इसे बढ़ाकर 15 जुलाई कर दिया गया है। ऐसे में छात्र विद्यालय में प्रवेश तो ले रहे हैं लेकिन शिक्षा के नाम पर अभी उनके पास कुछ भी नहीं है।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रूनिजा में एक शाला एक परिसर में छात्रों को पढ़ाया जाता है। वर्तमान में यहां लगभग 400 छात्र हैं और 15 कक्ष है। उन 15 कक्षों में से कुछ कक्ष ऐसे भी हैं जिनमें छत टपकती हैं और ऐसी टपकती छत के नीचे ही बारिश में छात्र पढऩे को मजबूर होंगे।
इसके साथ ही इस विद्यालय की शिक्षकों को लेकर दयनीय स्थिति है। यहां प्राचार्य का पद वर्ष 2017 से रिक्त है। तभी से ही यहां प्रभारी प्राचार्य अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में पदस्थ प्रभारी प्राचार्य ने भी ऑनलाइन आवेदन कर अपना तबादला मांग लिया है।
पढ़ाने के साथ अन्य स्कूलों का भी रखना पड़ता है हिसाब-किताब
इस संदर्भ में वर्तमान प्रभारी प्राचार्य बीएल पाटीदार ने चर्चा में बताया कि शासकीय उमावि रूनिजा में शिक्षकों की कमी काफी समय से चल रही हैं। प्राचार्य का पद भी वर्ष 2017 से रिक्त है। प्राचार्य एवं शिक्षकों की कमी के साथ इस संकुल के तहत दो हाई स्कूल बडग़ांव, खेड़ावदा के अतिरिक्त माधवपुरा, गजनी खेड़ी के माध्यमिक विद्यालय के साथ 10 शासकीय एवं 7 निजी विद्यालयों का संकुल केंद्र हैं। इन सबके रिकॉर्ड, विद्यालयों के कार्य देखरेख आदि गतिविधियां इस संकुल संचालित होती है। इसके अलावा अन्य और भी शासकीय कार्य व कार्यक्रम चलते रहते हैं। जो बिना प्राचार्य के संभव नहीं हैं।
सिर्फ भूगोल के शिक्षक बचे
इस स्कूल में कक्षा 6 12 तक में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, राजनीति, विज्ञान, भूगोल, भौतिक शास्त्र , रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, संस्कृत, कृषि आदि के शिक्षकों के पद रिक्त हैं। प्रभारी प्राचार्य का तबादला मांग लेने से अब पूरे विद्यालय में एकमात्र भूगोल के शिक्षक गोपाल प्रजापत बचते हैं। वे ही प्राचार्य का काम संभालेंगे ऐसे में ऐसे में वे छात्रों को पढ़ाएंगे या पूरे विद्यालय या संकुल की व्यवस्था देखेंगे समझ से परे हैं।
इनका कहना
शिक्षकों की पूर्ति का कार्य हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। यह नियुक्ति शासन स्तर पर होना है। वर्ष 2016 में काउंसलिंग हुई थी परन्तु आरक्षण के चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक लगी हुई। उसके निराकरण के बाद ही कुछ हो पायेगा। सम्भवत: एक-दो माह में नई नियुक्ति के सकती है। -रमा नहाटे, जिला शिक्षा अधिकारी, उज्जैन