पोस्टपेड से प्रीपेड सिम के लिए अब KYC जरूरी नहीं, टेलीकॉम सेक्टर के लिए सरकार ने लिए ये बड़े फैसले

नई दिल्ली। लंबे समय से एजीआर बकाया के संकट से जूझ रही टेलीकॉम इंडस्ट्री के लिए सरकार ने एकसाथ कई अहम ऐलान किए हैं। टेलीकॉम ऑपरेटर को एजीआर चुकाने पर राहत दी गई है तो वहीं 100 फीसदी एफडीआई को भी मंजूरी मिली है। इसके अलावा ग्राहकों को केवाईसी पर भी राहत देने का ऐलान किया गया है। आइए सिलसिलेवार समझते हैं कि केंद्र सरकार की कैबिनेट ने टेलीकॉम इंडस्ट्री और ग्राहकों के हित में कौन से बड़े फैसले लिए हैं।

एजीआर पर क्या हुआ: लंबे समय से टेलीकॉम सेक्टर को एडजस्ट ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर पर किसी बड़े फैसले का इंतजार था। सरकार ने कहा है कि एजीआर बकाये के परिभाषा में बदलाव किया जाएगा।  टेलीकॉम कंपनियां भी इसकी मांग कर रही थीं। वहीं, टेलीकॉम कंपनियों को मंथली इंटरेस्ट रेट को अब एनुअल कर दिया गया है। इसके अलावा पेनल्टी पर भी राहत दी गई है।

यही नहीं, टेलीकॉम ऑपरेटर्स बकाये को लेकर मोरेटोरियम ले सकेंगे। ये 4 साल तक के लिए दिया गया है। जो टेलीकॉम ऑपरेटर ये विकल्प चुनते हैं उन्हें सरकार को ब्याज भी देना होगा। आपको बता दें कि एजीआर की वजह से वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल पर भारी वित्तीय बोझ है। इस वजह से कंपनियां काफी संघर्ष कर रही थीं। इसके खिलाफा कंपनियों ने कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था।

क्या होता है एजीआर: एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) एक तरह की यूजेज और लाइसेंसिग फीस है। ये फीस संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा लिया जाता है। दूरसंचार विभाग पिछले कई सालों का बकाया मांग रहा है, जिसे देने में टेलीकॉम कंपनियां आनाकानी कर रह थीं।

-आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि टेलीकॉम सेक्टर के ऑटोमेटिक रूट में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है।
– इसके अलावा टेलीकॉम सेक्टर में अब डिजिटल फॉर्मेट में कस्टमर का वेरिफिकेशन होगा। अभी तक डॉक्युमेंट सब्मिट करना होता था लेकिन सरकार के इस फैसले से ग्राहक अब बिना किसी डॉक्युमेंट की हार्डकॉपी के वेरिफिकेशन करा सकेंगे। आईटी मंत्री ने बताया कि कागजी ग्राहक अधिग्रहण फॉर्म  (CAF) को डेटा के डिजिटल स्टोरेज से बदल दिया जाएगा।

– इसके अलावा ग्राहकों को प्रीपेड से पोस्टपेड में जाने पर दोबारा KYC की जरूरत नहीं होगी।
– वहीं, टावर के इंस्टॉलेशन के नियम में भी बदलाव हुआ है। सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर अब ये काम हो सकेगा।
– स्पेक्ट्रम नीलामी सामान्यतः प्रत्येक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में आयोजित की जाएगी।
– भविष्य की नीलामी में, स्पेक्ट्रम की अवधि 20 से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है, भविष्य में प्राप्त स्पेक्ट्रम के लिए 10 वर्षों के बाद स्पेक्ट्रम के सरेंडर की अनुमति दी जाएगी।

ऑटो सेक्टर को क्या मिला: मंत्रिमंडल ने भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए ऑटो, ऑटो कलपुर्जा और ड्रोन उद्योग के लिए 26,058 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी। पीएलआई योजना भारत में उन्नत ऑटोमोटिव तकनीक की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के विकास को प्रोत्साहित करेगी। इस कदम से 7.6 लाख से अधिक लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिलने का अनुमान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सिंहस्थ क्षेत्र में 5 साल में हुए निर्माण टूटेंगे

Wed Sep 15 , 2021
कलेक्टर ने सात दिन में सर्वे करने के निर्देश दिए उज्जैन, अग्निपथ। शहर में 2016 के बाद सिंहस्थ क्षेत्र में बनाए गए सभी अवैध निर्माण को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाई शुरू की जाएगी। सिंहस्थ क्षेत्र में हुए सभी पक्के निर्माण कार्यों को हटाया जाएगा। बुधवार को कलेक्टर आशीष […]