राष्ट्रीय सेविका समिति ने आयोजित बताया 1857 का समर, भारत विभाजन की विभीषिका
उज्जैन, अग्निपथ। देश के विभाजन होने से कितनी हानि हुई उस व्यथा को कह पाना मुश्किल है जिन्होंने इस विभाजन को देखा है उनको सुनने मात्र से ही दिल कांप जाता है।
उक्त बात राष्ट्रीय सेविका समिति द्वारा स्वाधीनता का अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में प्रेमचंद शोधपीठ की निदेशक अनिता पवार ने 1857 का समर तथा भारत विभाजन की विभीषिका को बताते हुए कही। लोकमान्य टिळक हा.से. विद्यालय सीबीएसई में आयोजित व्याख्यान एवं प्रदर्शनी की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता के पूजन से हुई। वक्ता का स्वागत विद्यालय की प्राचार्य डॉ संगीता पातकर ने किया।
मुख्य वक्ता अनीता पवार ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह अमृत महोत्सव हमारे देश प्रेम का, पूर्वजों के बलिदान का, देश के विकसित होने का, देश का वर्चस्व स्थापित करने का, युवा पीढ़ी को हमारे क्रांतिकारियों को याद कराने का तथा आत्मनिर्भरता का उत्सव है। स्वतंत्रता संग्राम के कवि, पत्रकार, लेखकों, साहित्यकारों, कवियों की भूमिका तथा सुभाष चंद्र बोस एवं सावरकर जी के कृतित्व पर भी आपने प्रकाश डाला। साथ ही आज भी समाज में जिस प्रकार की परिस्थितियां दिखाई दे रही है उसके लिए जागरूक रहने के लिए भी कहा। आज की युवा पीढ़ी को बताना है कि स्वतंत्रता के लिए कई क्रांतिकारियो ने बलिदान दिए हैं।
कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति उज्जैन विभाग बौद्धिक प्रमुख डॉ रेखा भालेराव, विद्यालय के उप प्राचार्य डॉ मिलिंद शुक्ल, देवेश श्रीवास्तव, अरविंद खोत, सावंत, कविता तेलंग, रंजना, अदिति रेणुका तथा समिति की पदाधिकारी तथा बहनें उपस्थित थीं। संचालन रुपाली विपट ने किया। व्यक्तिगत गीत सुनील चौहान ने गाया। वंदेमातरम के साथ कार्यक्रम समापन हुआ।