पीएचडी कांड : तीन शोधार्थी भी आरोपी बने, शेष पर भी जल्द शिकंजा

विक्रम के पूर्व कुलसचिव सहित पांच प्रोफेसर भी फंसे हैं मामले में

उज्जैन, अग्निपथ। विक्रम युनिर्वसिटी में हुए बहुचर्चित पीएचडी कांड में तीन शोधार्थी भी उलझ गए। लोकायुक्त ने बुधवार को तीनों को आरोपी बना लिया है। जांच पूरी होने पर शेष पर भी कार्रवाई तय है। मामले में आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी भी हो सकती है।

उल्लेखनीय है विक्रम विश्वविद्यालय में 6 मार्च 2022 को इंजीनियरिंग में पीएचडी प्रवेश परीक्षा हुई थी। इसके रिजल्ट में धांधली होने पर यूथ कांंग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव बबलू खींची ने 18 मई 2023 को लोकायुक्त में शिकायत की थी। मामले में लोकायुक्त निरीक्षक दीपक शेजवार ने जांच के बाद 21 जून को विवि विद्यालय कुलसचिव डॉ.प्रशांत पौराणिक, सहायक कुलसचिव वीरेंद्र ऊचवारे, प्रोफेसर डॉ. पीके वर्मा, डॉ. गणपत अहिरवार, इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रेाफेसर डॉ. वायएस ठाकुर पर भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज किया था।

परीक्षा रिजल्ट की 12 ओएमआर शीट के परिणाम में कांट-छांट कर 11 छात्रों को उत्तीर्ण करने करना पाए जाने पर ओएमआर शीट जब्त कर विवेचना की। तत्पश्चात बुधवार को शोधार्थी उज्जैन निवासी अमित मरमट, यूपी स्थित ऐटा के गौरव कुमार शर्मा और देवास की अंशुमा पटेल को भी आरोपी बना दिया। याद रहे कांड उजागर होने के बाद सहायक कुलसचिव का तबादला कर दिया।

आठ पर भी शिकंजे की तैयारी

लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार मामले में शेष आठ शोधार्थियों के भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुख्ता प्रमाण एकत्र कर इन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा। मामले में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी भी जल्द हो सकती है।

शिकायकर्ता का आरोप

बबलूृ खिंची के अनुसार विक्रम युर्निर्वसिटी में पहली बार इंजीनियरिंग में पीएचडी की परीक्षा हुई थी। बावजूद जिम्मेदारों ने बिना सब्जेक्ट के गाइड तय किए थे। परीक्षा परिणाम भी तुरंत जारी नहीं कर आंसर शीट में डबल गोले बनाकर देर रात जारी किए थे। प्रकरण में शामिल अन्य लोगों पर कार्रवाई नहींं होती है तो वे कोर्ट जाकर केस लगाएंगे।

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