खबरों के उस पार
विक्रम विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने नया प्रस्ताव पारित किया है कि युनिवर्सिटी का नाम बदलकर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय किया जाए। प्रस्ताव पर सरकार को निर्णय लेना है।
इस साल कोरोना काल के कारण १० करोड़ के घाटे में आई युनिवर्सिटी अगर नाम बदलकर अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहती है तो इसकी संभावना कम ही है। क्योंकि कई कारणों से विद्यार्थियों के बीच छबि खराब कर चुकी विक्रम विवि सिर्फ नाम बदलने से छबि सुधार नहीं सकती। रिजल्ट में देरी, कांपियां जांचने में मनमानी ऐसी की पिछली कक्षाओं के टॉपर यहां फेल हो जाते हैं, महीनो बाद मिलने वाली अंकसूची में कई गलतियां, छात्रवृत्ति के लिए लंबा इंतजार, विषय विशेषज्ञों की कमी, प्रशासनिक कार्यालय में विद्यार्थियों की सुनने वाला कोई नहीं, जैसे सैकड़ों उदाहरण आज विक्रम विवि की छबि खराब कर चुके हैं।
ऐसे ही हालातों को तत्कालीन कुलपति डॉ. रामराजेश मिश्र ने सुधारकर विक्रम विवि की खोई प्रतिष्ठा लौटाई थी। एक बार फिर ऐसे प्रयासों की जरूरत है। खुशी की बात तो यह है कि इस बार उच्च शिक्षा मंत्री भी शहर के ही हैं। लेकिन बात सिर्फ नाम बदलने से नहीं बनेगी, काम भी सुधारना होंगे।