पेप्सिको की 1266 करोड़ लागत की उज्जैन इकाई मार्च-2026 से पहले शुरू कर देगी उत्पादन

उज्जैन, (अर्जुन सिंह चंदेल) अग्निपथ। न भूतो न भविष्यति, बाबा महाकाल की कृपा उज्जैनवासियों पर बरसना शुरू हो गयी है। पहले महाकाल लोक ने इस उद्योग शून्य नगर को रोजगार दिया है अब मध्यप्रदेश में पिछले 21 वर्षों से काबिज भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रयास कामयाब होते दिख रहे हैं। जब प्रभु की इच्छा होती है तो वह जिसको देता है छप्पर फाड़ कर देता है वैसा ही कुछ इस पुरातन, ऐतिहासिक नगरी उज्जैयिनी के साथ भी हुआ।

शहर ने विकास की रफ्तार पकड़ी ही थी कि सौभाग्य से प्रदेश के मुखिया के रूप में डॉ. मोहन यादव की ताजपोशी हो गयी। शहर की हर नब्ज से वाकिफ मोहन जी ने अपना सारा ध्यान उज्जैन के विकास पर लगा दिया जिसकी परिणिति के रूप में उज्जैन-देवास रोड पर शहर से 15 किलोमीटर दूर विकसित हो चुका विक्रम नगर औद्योगिक क्षेत्र है।

मध्यप्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा विकसित किये गये इस क्षेत्र की सुंदरता देखते ही बनती है, आँखों पर यकीन ही नहीं होता कि धरती का यह सुंदर टुकड़ा मेरे ही उद्योग विहीन शहर का हिस्सा है, जहाँ पर 7 लाख उज्जैनवासियों के हसीन सपने हकीकत में बदल रहे हैं। एक बेहद संजीदा, संवेदनशील, कत्र्तव्यनिष्ठ और मुस्कुराहट बिखेरने वाले अधिकारी जो कि मध्यप्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के उज्जैन केन्द्र में मुख्य कार्यकारी संचालक के पद पर आसीन है राजेश राठौड़ जी, जो कि अपर कलेक्टर रेंक के अधिकारी हैं उनसे पहले ही मुलाकात में प्यार हो गया।

स्वाभाविक है जो प्यार बांटने में सिद्धहस्त हो दिल उसकी ओर अपने आप ही खिंचा चला जाता है जैसे चुंबक की ओर लोहा। जब श्री राठौड़ ने अपने केन्द्र की उपलब्धियों को हमें दिखाया तो हम भी हतप्रभ रह गये। चलिये अग्निपथ के पाठकों को भी हम सैर कराते हैं आकार ले रहे एक नये उज्जैन की।

लगभग 1100 एकड़ के विशालकाय क्षेत्र में फैली विक्रम औद्योगिक नगरी जाने के लिये हम दो तरफ से पहुँच सकते हैं पहला मार्ग देवास रोड पर कड़छा स्टेशन की ओर एम.आई.टी. के सामने से होकर गुजरने वाले मार्ग से दूसरा मार्ग नरवर के आगे पालखंदा से भी है। 25-25 फुट चौड़ी 15 किलोमीटर लंबी सडक़ों का जाल यहाँ पर आवागमन के लिये है।

25 फुट चौड़ी सडक़ जाने के लिये 25 फुट आने के लिये अलग-अलग बनी हुयी है। यहां स्थापित होने वाले उद्योगों के लिये नर्मदा का जल उपलब्ध कराया गया है जिसे शुद्ध करने के लिये जलशोधन संयंत्र के साथ ही उच्च दबाव से जल प्रदाय हेतु तीन उच्चस्तरीय पेयजल टंकियों का भी निर्माण किया गया है। विद्युत की अबाध आपूर्ति के लिये 33 एवं 11 किलोवाट की लाइनें तीन पॉवर ग्रिड सहित है। सीवर लाईन के साथ ही अशुद्ध पानी को शुद्ध करने के लिये सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया गया है। स्ट्रीट लाईटों के माध्यम से पूरे क्षेत्र को रोशन किया गया है जिसके कारण रात में दिन जैसा महसूस होता है। अग्नि से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिये फायर स्टेशन भी स्थापित किया गया है। चलिये अब यहाँ हो क्या रहा है इससे परिचित कराते हैं।

पेप्सिको अमरीकी बहुराष्ट्रीय कंपनी है जिसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है यह अनेक प्रकार के कार्बोनेटेड एवं गैर कार्बोनेटेड पेय, अनाज आधारित मीठे और नमकीन स्नैक्स और अन्य खाद्य पदार्थ के उत्पादन और विपणन का कार्य करती है। पेप्सी ब्रांड के अलावा यह कंपनी क्वेकर ओटस गेटोरेड, फ्रिटो ले, सोबे, नेकेड, ट्रॉपिकाना, कोपेल्ला, माउंटेन डयू, मिरिंडा, 7 अप जैसे दूसरे ब्रांडों की भी मालिक है पेप्सिको ने स्टारबक्स आइस्ड कॉफी जैसी कंपनियों के साथ भी साझेदारी कर रखी है।

पेप्सिको की भारत में 58 फैक्टरियां हैं जिनमें से चार भोजन के लिये समर्पित है, यह उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और महाराष्ट्र में हैं। दुनिया भर में 200 से अधिक उत्पाद बेचने वाली पेप्सिको उज्जैन के विक्रमनगर औद्योगिक क्षेत्र में 22 एकड़ जमीन में 1266 करोड़ की लागत से स्वाद विनिर्माण प्लांट डाल रही है दुनिया भर में उज्जैन के पूर्व मात्र 8 जगह ही इस तरह के प्लांट है। उज्जैन की इकाई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है और वर्ष 2026 में मार्च के पहले यह अपना उत्पादन शुरू कर देगी। सीधे तौर पर इस फेक्ट्री में 2000 लोगों को रोजगार मिलेगा इसके साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोग भी इसके साथ जुड़ेंगे।
शेष अगले अंक में…

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