प्रदेश मेें आने वाली 552 इलेक्ट्रिक बसों की डिलीवरी एक साल के लिए अटकी
उज्जैन, अग्निपथ। प्रदेश सरकार ने उज्जैन में 100 इलेक्ट्रिक बसों के चलाने की तैयारी की है, लेकिन इसके लिये अभी एक साल और इंतजार करना पड़ेगा।
मप्र में आने वाली 552 इलेक्ट्रिक बसों के लिए अभी एक साल और इंतजार करना पड़ेगा। पहले इन बसों की डिलीवरी 2025 की शुरुआत में होनी थी। लेकिन केंद्र के पास मप्र के अलावा कई अन्य राज्यों की डिमांड एक साथ आने पर बसों की डिलीवरी अटक गई है।
दिसंबर 2023 में केंद्र ने पीएम ई बस सेवा के तहत 57 हजार करोड़ रुपए की लागत से मप्र सहित कई राज्यों में 10 हजार बसें चलाने की घोषणा की थी। नगरीय प्रशासन विभाग ने 552 बसों की सप्लाई के लिए केंद्र को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। इंदौर को 150, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर को 100 -100 , ग्वालियर को 70, सागर को 32 बसें मिलनी थीं। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, देश में वर्तमान में ई बसों के उत्पादन क्षमता सीमित होने की वजह से एक साथ इतने बसों के आर्डर फाइनल नहीं हो पा रहे हैं।
पहले वित्तीय स्वीकृति पर अटकी बात
केंद्र सरकार की शर्त थी कि ई-बसों का संचालन करने वाली कंपनी को भुगतान सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को एक लिखित अंडरटेकिंग देना होगा। इस प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने आपत्ति जताई थी। योजना के तहत, कंपनी को स्टैंडर्ड बस के लिए 24 रुपए प्रति किमी, मिडी बस के लिए 22 रुपए प्रति किमी, और मिनी बस के लिए 20 रुपए प्रति किमी भुगतान किया जाना था।
बाद में, नगरीय प्रशासन विभाग ने यह सहमति व्यक्त की कि यदि बस संचालकों को घाटा होता है, तो नगरीय निकायों की अनुदान राशि से उस घाटे की भरपाई की जाएगी। इसके बाद, अक्टूबर 2023 में इस प्रस्ताव को भेजा गया।