नकली इनकम टैक्स अधिकारी बनकर लूट करने वाली अंतर्राज्यीय गैंग का पर्दाफाश, 8 आरोपी गिरफ्तार

धार, अग्निपथ। कुक्षी तहसील के ग्राम बाग में नकली इनकम टैक्स अधिकारी बनकर 600 ग्राम सोना और नकदी लूटने वाली शातिर गैंग को धार और खंडवा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दबोच लिया है। वारदात में शामिल कुल 14 आरोपियों में से 8 को पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर गिरफ्तार किया है।

आरोपियों के कब्जे से करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण, 30 लाख रुपये की दो कारें और नकदी जब्त की गई है। इस बड़ी सफलता का खुलासा सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आईजी इंदौर अनुराग सिंह, एसपी मयंक अवस्थी और खंडवा एसपी मनोज राय की उपस्थिति में किया गया।

फिल्मी अंदाज में दी थी वारदात को अंजाम

उल्लेखनीय है कि 13 मार्च की सुबह ग्राम बाग के ब्राह्मण मोहल्ले में ठेकेदार राजकुमार मालवीय के घर काले रंग की स्कॉर्पियो से कुछ बदमाश पहुंचे थे। खुद को इनकम टैक्स अधिकारी बताते हुए उन्होंने ‘ब्लैक मनी’ की सर्चिंग का झांसा दिया और परिवार को एक कमरे में बंधक बना लिया। इसके बाद अलमारी में रखा 600 ग्राम सोना और डेढ़ लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए। आरोपियों में से दो ने पुलिस जैसी वर्दी भी पहन रखी थी ताकि किसी को शक न हो।

रेकी में शामिल थे स्थानीय मददगार

पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात की पूरी पटकथा देवास निवासी नरसिंह बघेल ने रची थी, जो मूल रूप से डही का रहने वाला है। उसने मनावर के दिनेश और बाग के रमेश मोरी के साथ मिलकर क्षेत्र के बड़े व्यवसायियों की जानकारी जुटाई। आरोपियों का मानना था कि नकली रेड डालने पर पीड़ित डर के कारण पुलिस में शिकायत नहीं करेगा। वारदात से एक दिन पहले सभी आरोपी मनावर की एक होटल में रुके थे और घटना के बाद पहचान छिपाने के लिए स्कॉर्पियो को जंगल में छोड़कर अर्टिगा कार से भाग निकले थे।

मास्टरमाइंड के वाहन से मिलीं ‘महामंडलेश्वर’ की प्लेटें

एसपी मयंक अवस्थी के अनुसार, पुलिस ने घेराबंदी कर आबिद, अय्यूब शाह, दिनेश, दिलीप अहिरवार, मास्टरमाइंड शहजाद, रमेश मोरी, राजा उर्फ अब्दुल गफ्फार और नरसिंह बघेल को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान मुख्य आरोपी शहजाद के वाहन से ‘करणी सेना’ और ‘महामंडलेश्वर’ लिखी हुई प्लेटें भी बरामद हुई हैं। गैंग के अन्य सदस्य इकबाल, साहिल, मुरलीधर, रंजीत, संजीव और अब्दुल फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की पांच टीमें जुटी हुई हैं।

इन अधिकारियों का रहा सराहनीय योगदान

इस अंधे कत्ल जैसी गुत्थी को सुलझाने में टीआई कैलाश चौहान, ओपी अहिर, सुनील शर्मा, संजय रावत, राजेश यादव, ईश्वर सिंह चौहान, समीर पाटीदार, दीपक सिंह चौहान और साइबर सेल प्रभारी प्रशांत गुंजाल सहित समस्त पुलिस स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आईजी ने पूरी टीम को इस सफलता पर बधाई दी है।

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