उज्जैन, अग्निपथ । शहर के हीरा मिल क्षेत्र अंतर्गत आने वाले बड़ी मायापुरी इलाके के रहवासियों को जल्द ही पेयजल संकट से मुक्ति मिल सकती है। पिछले कई सालों से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे इस क्षेत्र के नागरिकों की समस्या को देखते हुए अब तीसरी बार यहाँ नई पाइपलाइन डालने का काम शुरू किया गया है। महापौर मुकेश टटवाल ने अपने विशेष मद से लगभग 25 लाख रुपए की राशि स्वीकृत कर पीएचई (PHE) की लाइन बिछाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को महापौर टटवाल ने जल कार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा के साथ खुद मौके पर पहुंचकर चल रहे कार्य का औचक निरीक्षण किया।
दो बार फेल हो चुका है सिस्टम, अब 160 MM की लाइन से उम्मीद हैरानी की बात यह है कि इसी जल कार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा के कार्यकाल में पिछले वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में दो बार पाइपलाइन डालने का काम किया जा चुका है। इसके बावजूद तकनीकी खामियों के चलते जनता के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया और शिकायतें जस की तस बनी रहीं।
अब तीसरी बार हो रहे इस कायाकल्प के तहत क्षेत्र में 160, 110 और 90 एमएम (MM) की मजबूत लाइनें डाली जा रही हैं। महापौर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि पाइपलाइन डलने के बाद पीएचई विभाग विशेष शिविर लगाएगा, जहां तय शुल्क जमा कर वैध कनेक्शन और डायरी जारी की जाएगी। जब तक सभी वैध कनेक्शन न हो जाएं, तब तक मुख्य लाइन चालू नहीं की जाएगी ताकि अवैध कनेक्शनों पर पूरी तरह लगाम कसी जा सके। निरीक्षण के दौरान एमआईसी सदस्य कैलाश प्रजापत, जितेंद्र कुवाल, सब इंजीनियर रिदम शाह और ठेकेदार उपस्थित रहे।
चर्चा का विषय: निरीक्षण से क्षेत्रीय पार्षद राखी कड़ैल गायब!
इस पूरे विकास कार्य के बीच शहर के सियासी गलियारों में एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। हीरा मिल क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर पाइपलाइन डालने के कार्य का निरीक्षण तो हो गया, लेकिन इस दौरान क्षेत्रीय पार्षद राखी कड़ैल कहीं नजर नहीं आईं। आम तौर पर प्रोटोकॉल के मुताबिक, जब भी किसी वार्ड में कोई सरकारी कार्य या निरीक्षण होता है, तो क्षेत्रीय पार्षद को सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया जाता है—चाहे वह पार्षद सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का। लेकिन इस महत्वपूर्ण आयोजन में पार्षद को न बुलाया जाना अब क्षेत्र में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है।
इनका कहना है: “पूर्व में पाइपलाइन के छोटे टुकड़ों को मुख्य लाइन से जोड़कर पानी सप्लाई करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वॉटर प्रेशर न होने के कारण वह पूरी व्यवस्था फेल हो गई थी। जहां तक पार्षद को न बुलाने का सवाल है, तो यह महापौर जी का निजी और त्वरित निरीक्षण कार्यक्रम था, इसलिए क्षेत्रीय पार्षद को आमंत्रित नहीं किया गया था।” — प्रकाश शर्मा, प्रभारी, जल कार्य समिति