उज्जैन, अग्निपथ। उज्जैन के नानाखेड़ा क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध कॉसमॉस मॉल इन दिनों ग्राहकों के लिए आकर्षण के साथ-साथ सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। मॉल की बाहरी दीवारों और ऊपरी हिस्सों पर बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते लटके हुए हैं। वर्तमान में यहाँ लगभग 30 से 40 विशाल छत्ते मौजूद हैं, जो मॉल में आने वाले हजारों लोगों और आसपास के रहवासियों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं। यह स्थिति विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए जोखिमपूर्ण बनी हुई है।
व्यस्ततम इलाके में मंडराता खतरा
कॉसमॉस मॉल शहर के सबसे व्यस्ततम और आधुनिक व्यावसायिक क्षेत्रों में से एक है। यहाँ दिनभर स्थानीय लोगों और पर्यटकों की भारी आवाजाही बनी रहती है। शाम के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि मॉल के बाहर फुटपाथ पर खाने-पीने की दुकानों और चाट के ठेलों के कारण लोगों की भारी भीड़ जमा होती है। गर्मी के इस मौसम में मधुमक्खियां अधिक सक्रिय और आक्रामक हो जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज आवाज, कंपन या छत्तों के पास किसी भी प्रकार की हलचल होने पर ये मधुमक्खियां झुंड में हमला कर सकती हैं, जिससे एक साथ कई लोग घायल हो सकते हैं।
हाट बाजार और भीड़भाड़ बढ़ाता जोखिम
मॉल के ठीक पास हर मंगलवार को सब्जी का हाट बाजार लगता है। इस दौरान दोपहर से लेकर देर रात तक यहाँ पैर रखने की भी जगह नहीं होती। आसपास कई रिहायशी कॉलोनियाँ हैं, जिसके चलते लोग पैदल ही इस मार्ग से गुजरते हैं। यदि किसी कारणवश मधुमक्खियां भड़कती हैं, तो भगदड़ मचने और बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री की गंध भी कई बार इन कीटों को आकर्षित करती है, जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है।
अतीत की दर्दनाक घटनाएं दे रही हैं चेतावनी
मधुमक्खियों के हमले को हल्के में लेना कितना घातक हो सकता है, इसका प्रमाण उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में पूर्व में हुई घटनाएं हैं। 4 जून 2025 को मक्सी रोड स्थित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में मधुमक्खियों के भीषण हमले में इंस्पेक्टर रमेश कुमार धुर्वे की मृत्यु हो गई थी। उस समय तेज आंधी के कारण पेड़ से छत्ता टूट गया था और मधुमक्खियों ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को अपना निशाना बनाया था।
इसी प्रकार, नीमच जिले के रानपुर गांव में 2 फरवरी 2026 को एक आंगनवाड़ी सहायिका कंचन बाई मेघवाल ने अपनी जान देकर 20-25 बच्चों को सुरक्षित बचाया था। उन्होंने अपनी साड़ी और तिरपाल से बच्चों को ढंक दिया था, लेकिन खुद उनके हमले का शिकार हो गईं। बड़नगर और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे मामले लगातार सामने आते रहे हैं, जो यह बताते हैं कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मधुमक्खियों की मौजूदगी कितनी जानलेवा हो सकती है।
त्वरित कार्रवाई की मांग और प्रशासन की भूमिका
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने जिला प्रशासन तथा वन विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि कॉसमॉस मॉल की बिल्डिंग पर लटके इन छत्तों को विशेषज्ञों की मदद से सुरक्षित तरीके से हटाया जाना चाहिए। साथ ही, जब तक यह समस्या हल नहीं होती, मॉल प्रबंधन को एहतियात के तौर पर चेतावनी बोर्ड लगाने चाहिए और भीड़ को नियंत्रित करने के उपाय करने चाहिए।
गर्मी के मौसम में इन छत्तों से शहद टपकने और मक्खियों के नीचे आने की समस्या भी बढ़ जाती है। यदि प्रशासन ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो यह लापरवाही किसी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है। नागरिकों ने मांग की है कि नगर निगम और वन विभाग की संयुक्त टीम मॉल का निरीक्षण करे और इस खतरे को जड़ से समाप्त करे ताकि आमजन बिना किसी डर के आवागमन कर सकें।
