उज्जैन, अग्निपथ। धार्मिक नगरी उज्जैन में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन विवादों के घेरे में आ गया है। हाल ही में कार्तिक मेला प्रांगण में भव्य आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों के जोड़ों का विवाह और निकाह संपन्न होना तय था। आयोजन की व्यापक तैयारियां नगर निगम द्वारा की गई थीं, लेकिन ऐन वक्त पर मुस्लिम समाज के 12 जोड़ों ने मुख्य आयोजन स्थल के बजाय हेलावाड़ी स्थित जमातखाने में हो रहे एक अन्य सम्मेलन में अपना निकाह पढ़वा लिया। इस घटनाक्रम पर नगर निगम के प्रभारी लोक निर्माण एवं उद्यान विभाग शिवेन्द्र तिवारी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने महापौर और निगमायुक्त को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद अलग हुआ आयोजन
महापौर मुकेश टटवाल और निगमायुक्त को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि 19 अप्रैल 2026 को नगर निगम उज्जैन द्वारा कार्तिक मेला प्रांगण में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में सामूहिक विवाह एवं निकाह का आयोजन रखा गया था। योजना के अनुसार, यहां 100 जोड़ों का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से और 12 जोड़ों का निकाह मुस्लिम परंपरा के अनुसार एक ही प्रांगण में होना था।
निर्धारित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राज्यसभा सांसद उमेशनाथ महाराज, महापौर मुकेश टटवाल और विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। इन अतिथियों ने मंच से 100 हिंदू जोड़ों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। हालांकि, हैरानी की बात यह रही कि निकाह के लिए पंजीकृत 12 मुस्लिम जोड़े मुख्य कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे। उन्होंने हेलावाड़ी क्षेत्र के जमातखाने में आयोजित एक अलग सम्मेलन में सहभागिता की, जिससे वे मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अतिथियों के आशीर्वाद समारोह का हिस्सा नहीं बन सके।
सरकारी बैनर गायब, अवहेलना का लगा आरोप
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब शासन और नगर निगम द्वारा कार्तिक मेला प्रांगण को आयोजन स्थल घोषित किया गया था, तो किस अधिकारी की अनुमति से इन जोड़ों का निकाह अन्यत्र करवाया गया। शिकायत पत्र में यह भी बताया गया है कि जहां हेलावाड़ी में निकाह संपन्न हुआ, वहां शासन या मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के कोई बैनर तक नहीं लगाए गए थे।
एमआईसी सदस्य शिवेन्द्र तिवारी का कहना है कि जब मुख्यमंत्री स्वयं नवदंपतियों को आशीर्वाद देने मौजूद थे, तब मुस्लिम समाज के इन जोड़ों का अनुपस्थित रहना शासन के प्रति अविश्वास को दर्शाता है। यह कहीं न कहीं मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों की अवहेलना है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि आयोजन से पूर्व निरीक्षण के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सभी विवाह एक ही स्थान पर होंगे, फिर भी इन निर्देशों की धज्जियां उड़ाई गईं।
क्या अब भी मिलेगा सरकारी योजना का लाभ
इस मामले में एक तकनीकी पेंच यह भी फंस गया है कि क्या इन 12 जोड़ों को मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि मिलेगी या नहीं। नियमानुसार, इस योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 49 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और गृहस्थी का सामान (बर्तन आदि) प्रदान किया जाता है। चूंकि इन जोड़ों का रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर पहले ही हो चुका है, इसलिए तकनीकी रूप से राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर हो सकती है। अब सवाल यह है कि जब उन्होंने मुख्य आयोजन से दूरी बनाई, तो क्या नगर निगम उन्हें बर्तन और अन्य सामग्री प्रदान करेगा।
दोषियों पर गाज गिरना तय
आयोजन के एक दिन पूर्व महापौर और एमआईसी सदस्यों ने स्थल निरीक्षण कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि सभी 112 जोड़ों का कार्यक्रम एक ही जगह होगा। इसके बावजूद अधिकारियों की शिथिलता के कारण मुस्लिम समाज के जोड़ों का निकाह अन्यत्र हुआ। महापौर मुकेश टटवाल और गरीबी उपशमन प्रकोष्ठ के प्रभारी जितेन्द्र कुंवाल ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए जांच के आदेश देने की बात कही है। यह जांच अब तय करेगी कि किन अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही से सरकारी गरिमा को ठेस पहुंची है।
