उज्जैन, अग्निपथ। उज्जैन नगर निगम के गलियारों में इन दिनों एक अजीबोगरीब संवैधानिक और राजनैतिक स्थिति निर्मित हो गई है। दरअसल, शहर की सरकार के सामने अब ‘एक ही सदन में दो विपरीत प्रस्तावों की स्थिति’ पैदा हो गई है। मामला नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 से जुड़ा है, जिसे लेकर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ताजा आदेश ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
मंत्री के आदेश से गरमाई सियासत
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर प्रदेश के समस्त नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर परिषदों के महापौरों व अध्यक्षों को निर्देशित किया है कि वे 10 दिनों के भीतर एक विशेष सम्मेलन आहूत करें। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 संशोधन विधेयक के संसद में पारित न हो पाने के विरुद्ध ‘निंदा प्रस्ताव’ पारित करना है। शासन का मानना है कि विपक्ष द्वारा इस विधेयक को रोकना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी बाधा है और इसकी पुरजोर निंदा की जानी चाहिए।
एक सदन और दो विरोधाभासी निर्णय
उज्जैन नगर निगम में इस आदेश के बाद असमंजस की स्थिति है। उल्लेखनीय है कि पिछले विशेष सम्मेलन में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में गिर गया था, तब सदन की कार्यवाही चली थी और उस दौरान इस विषय पर एक ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पास किया जा चुका था। अब शासन के नए निर्देशों के बाद दोबारा विशेष सम्मेलन बुलाकर उसी विषय पर ‘निंदा प्रस्ताव’ पास किया जाना है। ऐसे में नगर निगम के इतिहास में यह संभवतः पहला मौका होगा जब एक ही सदन, एक ही विषय पर दो बिल्कुल विपरीत प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगाएगा।
महिला सशक्तिकरण पर प्रहार
नगरीय प्रशासन मंत्री द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक संसद में पारित न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक एवं निंदनीय है। यह विधेयक महिलाओं को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व देने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का एक ऐतिहासिक अवसर था। विपक्ष के विरोध के कारण इस विधेयक का गिरना न केवल महिलाओं के अधिकारों का हनन है, बल्कि देश के समग्र विकास की गति को भी बाधित करने वाला कृत्य है।
दलगत राजनीति से ऊपर उठने की जरूरत
शासन के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के विकास का प्रश्न है। जब तक आधी आबादी को समान अवसर और अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध कर समाज में समानता स्थापित करने के प्रयासों को कमजोर किया है। इसी कारण सरकार चाहती है कि स्थानीय निकायों के माध्यम से जनता की आवाज बुलंद हो और इस कृत्य की आधिकारिक रूप से निंदा की जाए।
10 दिन में विशेष सम्मेलन की तैयारी
अब गेंद महापौर और निगम अध्यक्ष के पाले में है। मंत्री के आदेशानुसार, अगले 10 दिनों के भीतर विशेष सम्मेलन बुलाना अनिवार्य है। नगर निगम प्रशासन अब इस तैयारी में जुट गया है कि किस तरह पुराने प्रस्ताव और नए आदेश के बीच समन्वय बिठाया जाए। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति सदन में तीखी बहस का कारण बन सकती है, क्योंकि विपक्ष पहले से पारित धन्यवाद प्रस्ताव का हवाला देकर नए निंदा प्रस्ताव का विरोध कर सकता है।
