अवैध उगाई मामले में नवागत कलेक्टर से न्याय की उम्मीद
नलखेड़ा, अग्निपथ। विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के गर्भगृह में स्वर्ण रजत सौंदर्यीकरण के नाम पर गैर सरकारी संस्था सुदर्शन सेवा समिति द्वारा शासकीय समिति को दरकिनार कर अवैध रूप से चढ़ावा लेने का मामला गहराता जा रहा है। मंदिर के भीतर बैठकर ली गई सोने-चांदी की सामग्री और करोड़ों रुपये नकद की अवैध वसूली के इस गंभीर मामले में अब नवागत कलेक्टर शेर सिंह मीना के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। नगर के आम नागरिकों की जुबान पर यही सवाल तैर रहा है कि क्या नवागत कलेक्टर जांच दल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर पाएंगे।
वर्ष 2024 से बेरोकटोक जारी थी गैर कानूनी वसूली
विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में वर्ष 2024 से अस्तित्व में आई गैर पंजीकृत संस्था सुदर्शन सेवा समिति द्वारा मंदिर के गर्भगृह में स्वर्ण रजत सौंदर्यकरण का बहाना बनाकर बड़ी उगाई की जा रही थी। समिति द्वारा शासकीय प्रबंध समिति को पूरी तरह नजरअंदाज कर रसीदें काटी जा रही थीं और श्रद्धालुओं से करोड़ों रुपये के सोने-चांदी सहित बड़ी मात्रा में नकद राशि अवैध रूप से ली जा रही थी। समाचार पत्रों में इस पूरे फर्जीवाड़े की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने और भंडाफोड़ होने के बाद हड़बड़ी में इस अवैध वसूली को बंद किया गया था।
पूर्व कलेक्टर ने रिपोर्ट मिलने के बाद भी साधी चुप्पी
मामले के तूल पकड़ने के बाद तत्कालीन कलेक्टर प्रीति यादव ने 7 जुलाई को तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया था और उन्हें एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। गठित जांच दल ने तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद तत्कालीन कलेक्टर द्वारा न तो इस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया और न ही अवैध वसूली में शामिल दोषियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम उठाया गया।
जांच प्रक्रिया में लीपापोती के गंभीर आरोप
कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि जांच दल ने केवल औपचारिकता निभाते हुए लीपापोती की। दल ने गैर सरकारी संस्था सुदर्शन सेवा समिति द्वारा अवैध रूप से वसूले गए सोने-चांदी व नकद रुपये तो बरामद कर लिए, लेकिन दोषियों पर शिकंजा नहीं कसा। जांच टीम ने महज एक दिन मंदिर परिसर में पहुंचकर संस्था के सदस्यों द्वारा दिए गए गिने-चुने दस्तावेजों को ही स्वीकार किया। न तो समिति के किसी सदस्य से गहन पूछताछ की गई और न ही उनके बैंक खातों को खंगाला गया। सूत्रों का दावा है कि यदि संस्था के सदस्यों के बैंक खातों की निष्पक्ष जांच की जाती तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते थे।
नवागत कलेक्टर से नगरवासियों को आस
तत्कालीन कलेक्टर प्रीति यादव के स्थानांतरण के पश्चात नए कलेक्टर के रूप में शेर सिंह मीना ने सोमवार को जिले का पदभार ग्रहण कर लिया है। नवागत कलेक्टर के कमान संभालते ही नगर के प्रबुद्धजनों और आम नागरिकों में एक नई आस जगी है। लोगों को उम्मीद है कि नवागत कलेक्टर शेर सिंह मीना पूर्व में गठित जांच दल की रिपोर्ट को बिना किसी दबाव के सार्वजनिक करेंगे और मंदिर की मर्यादा से खिलवाड़ कर अवैध वसूली करने वाले दोषी सदस्यों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करेंगे।

