बड़नगर, अग्निपथ। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कठोर कारावास तथा 11,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इस फैसले के बाद क्षेत्र में कानून व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
नाबालिग को बहला-फुसलाकर सूरत ले गया था आरोपी
यह मामला वर्ष 2025 का है, जब उज्जैन जिले के थाना इंगोरिया क्षेत्र से एक नाबालिग बालिका संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल अपहरण की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनसे पता चला कि ग्राम रणवा (थाना बड़नगर) निवासी सांवरिया पिता गंगाराम बालिका को बहला-फुसलाकर गुजरात के सूरत शहर ले गया था। सूरत में आरोपी ने बालिका को अपने पास रखा, उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया और उस पर विवाह करने के लिए अनुचित दबाव भी बनाया।
वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने बनाई मजबूत कड़ी
घटना की गंभीरता को देखते हुए इंगोरिया पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए कार्रवाई की और बालिका को सुरक्षित दस्तयाब किया। पुलिस ने मामले में पूरी पारदर्शिता और तत्परता दिखाते हुए पीड़ित बालिका का चिकित्सीय परीक्षण करवाया और उसके विस्तृत बयान दर्ज किए। जांच अधिकारी द्वारा घटनास्थल से वैज्ञानिक एवं परिस्थिति आधारित महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए।
पुलिस द्वारा जुटाए गए फॉरेंसिक साक्ष्य, चिकित्सीय रिपोर्ट और गवाहों के बयानों ने आरोपी के खिलाफ अपराध को पूरी तरह सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाई। विवेचना पूर्ण होने के बाद थाना इंगोरिया पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता तथा लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी से मिली सख्त सजा
मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो न्यायालय, बड़नगर में संपन्न हुई। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने कानून के प्रावधानों के तहत अत्यंत प्रभावी और मजबूती से पक्ष रखा। कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए चिकित्सीय साक्ष्य, पीड़िता के बयान तथा पुलिस द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने सांवरिया को धारा 5(L)/6 पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत दोषी पाया।
विशेष न्यायालय ने अपराध की नृशंसता को देखते हुए आरोपी सांवरिया को 20 वर्ष के सश्रम कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी पर 11,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
समाज में कड़ा संदेश देने वाला फैसला
बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में न्यायालय का यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्यप्रणाली और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के कारण ही पीड़िता को समय पर न्याय मिल सका है। इस निर्णय से अपराधियों में कानून का भय कायम होगा और समाज में बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

