उज्जैन, अग्निपथ। मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर उज्जैन आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के दो सौ से अधिक आयुर्वेद छात्र-छात्राओं का अनिश्चितकालीन प्रदर्शन दूसरे दिन भी पूरी उग्रता के साथ जारी रहा। सोमवार से धरने पर बैठे विद्यार्थियों ने मंगलवार को प्रदर्शन स्थल पर ही सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करने के उद्देश्य से एक विशेष यज्ञ अनुष्ठान संपन्न किया। इस आंदोलन को और अधिक तीव्र रूप देते हुए कॉलेज की दो जुझारू डॉक्टर छात्राओं डॉ. मुस्कान मंदावत और डॉ. अंजलि राठौर ने शासन के रवैये के विरोध में चौबीस घंटे की क्रमिक भूख हड़ताल प्रारंभ कर दी है।
पेज पर मांगें लिखकर यज्ञ में दी आहुतियां
शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद कॉलेज परिसर में जारी इस उग्र प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में एकत्रित होकर प्रशासनिक हठधर्मिता के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विद्यार्थियों ने अनोखा तरीका अपनाते हुए अपनी विभिन्न मांगों को अलग-अलग कागजों पर लिखा और फिर मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ कुंड में उनकी आहुतियां अर्पित कीं। धन्वंतरि आयुर्वेदिक कॉलेज में जारी यह आंदोलन अब दिन-ब-दिन और अधिक व्यापक रूप धारण करता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को आंदोलनकारी विद्यार्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी समस्याओं के समाधान हेतु उच्च स्तरीय अधिकारियों से संवाद करने भोपाल भी पहुंचा था। हालांकि, भोपाल में हुई इस वार्ता में कोई ठोस सहमति न बन पाने और बात न बनने के कारण मंगलवार को भी विद्यार्थियों का प्रदर्शन निरंतर जारी रहा।
एनसीआईएसएम के नियमों का खुला उल्लंघन
प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं ने आयुष विभाग और शासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धति को संचालित करने वाली राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग के स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद हैं। इस आयोग के क्लॉज पंद्रह बी और क्लॉज पंद्रह डी में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि देश के सभी राज्यों में समस्त चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न का स्टाइपेंड पूरी तरह समान होना चाहिए। नियमानुसार मानदेय के वितरण में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश शासन द्वारा आयुर्वेद चिकित्सकों के साथ लगातार अन्याय और असमानता का व्यवहार किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
एमबीबीएस के समान मानदेय देने की उठाई मांग
आंदोलनरत विद्यार्थियों का कहना है कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में आयुर्वेद इंटर्न को बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। वर्तमान स्थिति में मध्य प्रदेश के भीतर बीएएमएस इंटर्न को प्रतिमाह मात्र 9,383 रुपये मानदेय के रूप में दिए जा रहे हैं, जो कि वर्तमान महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है।
छात्रों ने तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि अस्पताल में सभी इंटर्न डॉक्टर एमबीबीएस इंटर्न की भांति ही समान कार्य करते हैं और उतनी ही कठिन ड्यूटी निभाते हैं। इसके बावजूद शासन द्वारा मानदेय वितरण में वर्षों से बड़ा अंतर रखा जा रहा है। हाल ही में शासन ने एमबीबीएस इंटर्न का मानदेय बढ़ाकर 21,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया है।
इसी तर्ज पर आयुर्वेद छात्रों ने भी मांग की है कि उनका स्टाइपेंड तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर एमबीबीएस के बराबर किया जाए। विद्यार्थियों का स्पष्ट कहना है कि अब वे केवल मौखिक आश्वासनों या घोषणाओं से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि उन्हें शासन की ओर से त्वरित लिखित आदेश चाहिए।

