उज्जैन, अग्निपथ। देवास रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र से सटी पार्श्वनाथ सिटी के निवासी मंगलवार को अपनी जानलेवा समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में उमड़ पड़े। औद्योगिक इकाइयों से निकल रहे जहरीले रासायनिक अपशिष्ट के कारण कॉलोनी का भूजल इस कदर जहरीला हो चुका है कि लोग नल खोलते ही बदबू और झागदार पानी देखकर कांप उठते हैं। अपनी बेबसी और आक्रोश को दर्शाने के लिए महिलाएं और पुरुष डब्बों तथा जारों में बदबूदार, मटमैला पानी भरकर सीधे कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंच गए।
रहवासियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने दूषित पानी की बोतलें लहराते हुए चेतावनी दी कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो पार्श्वनाथ सिटी की स्थिति भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसी दर्दनाक हो जाएगी।
केमिकल और फार्मास्युटिकल इकाइयों पर मनमानी का आरोप
पार्श्वनाथ सिटी रहवासी सहकारी सोसायटी के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचे नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी कॉलोनी के ठीक पीछे कई केमिकल, फार्मास्युटिकल, पेस्टीसाइड और अन्य भारी औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। इन कारखानों के संचालक नियमों को ताक पर रखकर अपने रासायनिक अपशिष्ट और घातक रसायनों को खुले नालों में बहाने के साथ-साथ सीधे जमीन के भीतर छोड़ रहे हैं।
लगातार रासायनिक रिसाव के कारण संपूर्ण क्षेत्र का भूमिगत जल बुरी तरह प्रदूषित और जहरीला हो चुका है। रहवासियों का कहना था कि मुख्यमंत्री के गृह जिले और विधानसभा क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद उन्हें अपनी मूलभूत आवश्यकता पेयजल के लिए इस तरह भटकना पड़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।
तीन महीने से लगातार गुहार, फिर भी बेखबर बना प्रशासन
कलेक्ट्रेट पहुंचे रहवासियों का दर्द तब छलका जब उन्होंने बताया कि वे पिछले तीन महीनों से लगातार शासन और प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। इस अवधि में नागरिकों ने जनसुनवाई, कलेक्टर कार्यालय, जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र, नगर निगम तथा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों को दर्जनों बार लिखित शिकायतें और आवेदन सौंपे।
इसके बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार विभाग ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मंगलवार को जब पीड़ित रहवासी जनसुनवाई में पहुंचे तो शुरुआत में कलेक्टर वहां मौजूद नहीं थे। इस पर नागरिकों ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें जार में भरा दूषित पानी दिखाया और अपनी आपबीती सुनाई। बाद में कलेक्टर के आगमन पर उन्हें भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया।
90 ट्यूबवेल का पानी हुआ जहरीला, झाग और दुर्गंध से सांस लेना दूभर
सोसायटी के प्रतिनिधि रविंद्र चंद्रवंशी ने अधिकारियों के समक्ष पानी का जार रखते हुए बताया कि पूरी पार्श्वनाथ सिटी कॉलोनी अपने दैनिक जल संकट के लिए करीब 90 जलस्रोतों और ट्यूबवेलों पर पूरी तरह आश्रित है। दुर्भाग्य से अब इन सभी ट्यूबवेलों से आने वाले पानी में अत्यधिक गंदगी, केमिकल का झाग, अजीब रंग और बर्दाश्त न होने वाली दुर्गंध आ रही है।
औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला रसायन भूमि के निचले जलस्तरों में पूरी तरह समा चुका है। कॉलोनी के सैकड़ों परिवारों के पास इस जहरीले पानी का इस्तेमाल करने या प्यासे रहने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इस कारण क्षेत्र में त्वचा रोग और पेट की गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है।
निष्पक्ष जांच, फैक्ट्रियों को सील करने और वैकल्पिक पेयजल की मांग
प्रशासनिक बेरुखी से नाराज रहवासियों ने कलेक्ट्रेट में अपनी मांगों का एक स्पष्ट मांग पत्र सौंपा। उन्होंने मांग की कि पार्श्वनाथ सिटी और उससे लगे पूरे औद्योगिक क्षेत्र के भूजल के नमूने तत्काल एकत्रित किए जाएं और उनकी जांच निष्पक्ष रूप से अलग-अलग प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं में कराई जाए। इसके अतिरिक्त, अवैध रूप से रासायनिक अपशिष्ट छोड़ने वाली संदिग्ध औद्योगिक इकाइयों की तत्काल फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कराई जाए और वहां से सैंपल लिए जाएं।
सोसायटी ने स्पष्ट मांग रखी कि प्रदूषण फैलाने वाली दोषी फैक्ट्रियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उन्हें अविलंब सील किया जाए। साथ ही, जब तक भूजल शुद्ध नहीं होता, तब तक पूरी कॉलोनी के लिए नगर निगम द्वारा टैंकरों या अन्य माध्यमों से वैकल्पिक शुद्ध पेयजल की निर्बाध व्यवस्था कराई जाए।
