उज्जैन, अग्निपथ। श्रावण मास के तीसरे सोमवार को भगवान महाकाल की तीसरी सवारी लाव-लश्कर के साथ निकाली गई। सवारी में बाबा ने लाखों भक्तों को तीन अलग-अलग रूपों में दर्शन देकर अभिभूत किया। चांदी की पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर विराजमान थे, तो गरुड़ के रथ पर शिव तांडव और पीछे हाथी पर चांदी के सिंहासन पर सवार होकर मनमहेश निकले।
दोपहर में मंदिर के सभामंडप में परंपरागत पूजन-अर्चन के बाद सवारी शाम 4 बजे शुरू हुई। शासकीय पुजारी पंडित घनश्याम गुरु ने भगवान का अभिषेक-पूजन कर आरती की। इस अवसर पर पुजारी यश गुरु भी मौजूद थे। पूजन में मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के बेटे व अन्य परिजन, नगर निगम की अध्यक्ष कलावती यादव, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, सांसद अनिल फिरोजिया, भोपाल से कृष्णा गौर सहित मंदिर के अधिकारी व पंडे-पुजारी मौजूद रहे।
जयकारों और पुष्पवर्षा से गुंजायमान हुआ सवारी मार्ग
मुख्य प्रवेश द्वार पर सशस्त्र जवानों की सलामी के बाद सवारी नगर भ्रमण के लिए आगे बढ़ी। मंदिर से शुरू होकर सवारी गुदरी चौराहा, कहारवाड़ी से रामघाट के पास राणोजी की छत्री के सामने घाट पर पहुंची, जहां भगवान महाकाल का शिप्रा के जल से पुजारी आशीष गुरु ने अभिषेक-पूजन संपन्न कराया।
यहां से सवारी रामानुजकोट, कार्तिक चौक, ढाबारोड, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होकर शाम 7 बजे के बाद वापस मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। सवारी मार्ग पर दोपहर से ही लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए जमा हो गए थे। जैसे ही सवारी निकली और बाबा की पालकी सामने आई, श्रद्धालुओं ने जय-जय महाकाल के जयकारों के साथ पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
धार्मिक धुनों, डमरू और भजनों पर झूमे श्रद्धालु
सवारी में पुलिस व महाकाल मंदिर समिति के बैंड आकर्षक धार्मिक धुन बजाते हुए निकले। सबसे आगे धमाके करते तोपची राजाधिराज महाकाल के आगमन की सूचना देते चल रहे थे। इसके पीछे घुड़सवार दल, पैदल मार्च पास्ट करती सशस्त्र जवानों की टुकड़ियां और भजन मंडलियां शामिल रहीं।
उज्जैन व आसपास के क्षेत्रों से आई भजन मंडलियों ने एक से बढ़कर एक धार्मिक भजन प्रस्तुत कर सवारी मार्ग में उपस्थित श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। एक साथ समूह में कई भक्तों ने झांझ व डमरू का वादन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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