120 करोड़ की लागत से बन रहे आरओबी पर डामर उखड़ा तो सीमेंट से भरने लगे गड्ढे
धार, अग्निपथ। इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुनारखेड़ी फाटा स्थित करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में पहली ही बारिश ने निर्माण की पोल खोलकर रख दी है। बारिश के कारण सड़क उखड़ने और सात स्थानों पर सरिया बाहर आने के बाद अब निर्माण एजेंसी इन गड्ढों को डामर की जगह सीमेंट (आरसीसी) से भरने का काम कर रही है।
कुछ दिनों पहले जिन गड्ढों को डामर के पैबंद से पाटने का दावा किया गया था, वे फिर से उखड़ गए। बार-बार बदलते मरम्मत के तरीकों से यह सवाल उठने लगा है कि यह सड़क है या फिर कोई प्रयोगशाला, जहां हर कुछ दिन में नया तरीका आजमाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डामर और सीमेंट की अलग संरचना होने से भविष्य में और तकनीकी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
समय सीमा की जल्दबाजी में अधूरे मार्ग पर शुरू कर दिया यातायात
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत इंदौर से धार तक ट्रेन का ट्रायल तय होने के कारण इस आरओबी पर जल्द से जल्द आवाजाही शुरू करने का भारी दबाव था। इसी जल्दबाजी के चक्कर में एक लेन का निर्माण कार्य पूरा होते ही वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई, जबकि सड़क पर अभी डबल कोटिंग का काम होना बाकी था। इसके बाद सर्विस रोड को बंद करके रेलवे ट्रैक जोड़ दिए गए और पूरा यातायात इसी अधूरे मार्ग पर डायवर्ट कर दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि सिंगल कोटिंग वाली सड़क पहली ही बारिश की मार नहीं झेल पाई और जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए।
कम बारिश में यह हाल तो तेज वर्षा में मंडराएगा बड़ा खतरा
धार जिले में अभी तक सामान्य से भी कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन इतनी सी वर्षा में ही आरओबी की सड़क पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुकी है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि तेज बारिश का दौर शुरू हुआ तो गड्ढों की संख्या और बढ़ जाएगी। सड़क पर जमा पानी, उखड़ती सतह और बाहर निकले सरिए राहगीरों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि निर्माण के दौरान ही सड़क बार-बार टूट रही है, तो परियोजना की मजबूती पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
निर्माण एजेंसी लगातार मरम्मत का काम तो कर रही है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है। पहले किया गया डामर पैचवर्क जब पूरी तरह से असफल साबित हुआ, तो अब सीमेंट का भराव शुरू कर दिया गया। ये लगातार बदलते प्रयोग दर्शाते हैं कि मूल समस्या को हल करने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग के इस मुख्य मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से समझौता किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।
एक नजर में परियोजना की स्थिति
- कुल लागत: करीब 120 करोड़ रुपये
- मुख्य स्थान: सुनारखेड़ी फाटा, इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग
- मुख्य खराबी: सात स्थानों पर ब्रिज जॉइंट से सरिए बाहर निकले
- अस्थायी उपाय: डामर का पैचवर्क फेल होने के बाद अब आरसीसी भराव शुरू
- बड़ी लापरवाही: डबल कोटिंग का कार्य पूरा होने से पहले ही शुरू हुआ यातायात
- मौजूदा स्थिति: पहली ही बारिश में सड़क पूरी तरह उखड़ी, गड्ढे दोबारा उभरे

