व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो 24 घंटे बाद उपवास पर बैठेंगे विधायक, बोले स्थिति सरकार और जिला प्रशासन के नियंत्रण से बाहर

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मरीजो ओर परिजनों को रोते बिलखते नहीं देख सकता- महेश परमार

उज्जैन। मरीज अस्पतालों के बाहर भर्ती होने के लिए खड़े और अस्पताल के ताले लगे, सडक़ पर तड़पने जैसी स्थिति भयावह होती जा रही, सरकार फ्री में राशन दे रही, अरे लोग राशन से नही ऑक्सीजन की कमी से मर रहे। जीवन रक्षक इंजेक्शन रेमेडीसीवर या तो ब्लैक हो रहा या भाजपा नेताओं के इशारे पर बंट रहा जनता रोती बिलखती दर दर भटक रही उसको मिल नहीं रहा।

विधायक महेश परमार ने कहा आम जन मौत के भय में हैं ऐसे में मैं चुप नहीं बैठ सकता। परमार ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे में व्यवस्थाएं नहीं सुधारी, हालतों में सुधार नहीं हुआ तो उपवास शुरू करूंगा, किसी भी होनी अनहोनी की समस्त जवाबदारी सरकार की होगी। सरकार भाजपा की है हम विवश है इसलिए जनता के कष्ट दूर हो इसलिए खुद कष्ट सहन कर गांधी वादी तरीके से उपवास करेंगे। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षगण एवं पूर्व जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष अजीत सिंह तथा कांग्रेस के साथी गण भी मौजूद रहेंगे।

अब किसी की जान न जाए

महेश परमार ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता है कि संक्रमित मरीज को इलाज मिले। स्वास्थ्य व्यवस्था के अभाव में किसी की जान ना जाए, हमने अपने खोए हैं हम अपने सामने अपने लोगों को तड़पता हुआ नहीं देख सकते। इसलिए व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार होना चाहिए।

सरकार और प्रशासन लाख ढिंढोरा पीटे की सारी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद है। लेकिन धरातल पर अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है मैं स्वयं भी अस्पतालों के दौरे कर रहा हूं। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात है साधारण मरीज और संक्रमित मरीज का साथ में भर्ती रहना। इससे तो सभी संक्रमित हो जायेंगे माधव नगर अस्पताल में मरीजों की संख्या आरक्षित बिस्तरों से अधिक है प्रतिदिन 5 से 8 मौत हो रही है। जिनका कोरोना वायरस से मौत होना नहीं है तो फिर वह कोरोना वार्ड में क्या कर रहे थे यह बहुत बड़ा प्रश्न है?

समय पर जाग जाते तो अब तक ऑक्सीजन का प्लांट लग जाता

डॉक्टर कह रहे हैं, स्टाफ कह रहा है, मरते तड़पते मरीज कह रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी है रेमडिसिवर इंजेक्शन नहीं है, दवाइयां नहीं है, स्टाफ कम है तो फिर सरकार को सपना आ रहा है कि सब कुछ ठीक है। सरकार के नुमाइंदे आंकड़ा छुपाने में लगे हुए हैं। परमार ने कहा 1 साल बाद आपदा प्रबंधन की बैठक में बुलाया जब मैंने सवाल ज्यादा खड़े किए तो मुझे बुलाना छोड़ दिया।

मैंने 12 अप्रैल को ही 11 लाख की राशि स्वीकृत कर दी थी और सामग्री भी लाकर दे दी है। मेरे साथ ही मंत्री, पूर्व मंत्री व अन्य और राशि स्वीकृत कर देते तो अब तक प्लांट लग ही जाता संवेदनशीलता मर सी गई है, बस लगे हैं नाकामी छुपाने में।

तराना में आक्सीजन के साथ 100 बेड लगाकर कोविड सेंटर चालू हो

महेश परमार ने कहा तराना तहसील मेरा विधानसभा क्षेत्र इस बार सबसे बडा हॉट स्पॉट बन गया है। यहां तुरंत कोविड सेंटर चालू हो। 100 ऑक्सीजन सहित बेड लगाए जाएं। विधानसभा निधि, खुद अपनी ओर से तथा जनसहयोग से हम भी करेंगे सहयोग।

उज्जैन में एक शासकीय हेल्प डेस्क लगाई जाए जहां 24 घंटे सहायता मिल सके। सहायता केंद्र पर उज्जैन के सभी अस्पतालों में स्थान की जानकारी प्रति 2 घंटे में अपडेट मिलती रहे स्थान के साथ ही ऑक्सीजन वाले और बिना ऑक्सीजन वाले बिस्तरों का आंकड़ा भी स्पष्ट होना चाहिए। जिससे मरीजों को भटकना ना पड़े। इन सहायता केंद्रों पर शहर की दानदात्री संस्थाओं द्वारा दी जा रही सेवा व देने वाले के नंबर भी मिल जाये जिससे वही से फोन कर सहायता ली जा सके।

निजी अस्पताल सरकार के नियंत्रण में हो

जीवन रक्षक माने जाने वाला रेमडिसिवर इंजेक्शन शासकीय नियंत्रण में होना चाहिए। कहीं पर भी संक्रमित मरीज के साथ संदिग्ध मरीज या साधारण मरीज को नहीं रखा जाए। मरीज को भर्ती करने के 24 घंटे में उसकी रिपोर्ट मरीज को दी जाए।

आरटी पीसीआर नेगेटिव आने और सीटी स्कैन में संक्रमण हो तो ऐसे मरीज को पॉजीटिव ही माना जाए और उसका इलाज किया जाए। सभी ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर या पूर्व से स्थापित अस्पतालों पर कोरोना सेंटर बना देना चाहिए और वहीं की व्यवस्था वही कर देना चाहिए। जिससे जिला मुख्यालय पर लोड कम होगा।

प्रायवेट अस्पताल अगले 1 महीने तक सरकार के नियंत्रण में होना चाहिए, जिसमें वेंटिलेटर वाले ऑक्सीजन वाले और बिना अक्सीजन वाले बिस्तर पर पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर मरीजों को भर्ती किया जाना चाहिए। प्रायवेट अस्पताल को दिए जाने वाले रेमडिसिवर इंजेक्शन की स्टॉक एंट्री होना चाहिए। किस मरीज को दिया गया, उसका पूरा विवरण एवं कितने में दिया गया यह जानकारी भी स्पष्ट होना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई भी होना चाहिए।

कलेक्टर उज्जैन को दान कर रही संस्थाओं की बैठक कर उनसे आग्रह करना चाहिए कि वह एक ही स्थान पर अपने द्वारा दिए जा रही सुविधाओं के साथ सहायता केंद्र बना कर बैठे जहां वे अपनी संस्था व उसके द्वारा दी जा रही सेवाओं का उल्लेख करते हुए अपनी संस्था का नाम भी उल्लेखित कर सकें।

हरसिद्धि धर्मशाला में अस्पताल नि:शुल्क प्रारंभ किया जाए

-विधायक महेश परमार ने सुझाव दिया कि प्रशासन को अपील करना चाहिए और हम भी अपील करते हैं कि जो लोग सहायता करना चाहते हैं जो संस्थाएं सहायता करना चाहती है और जो राजनीतिक दल सहायता करना चाहते हैं वह सभी भवन देने की बात ना करें इसकी बजाय भवन में पूर्ण सुविधाएं देकर केवल चिकित्सकीय सहायता प्रशासन से मांग कर अस्पताल प्रारंभ कर सकते हैं।

कई लोग स्वयं जांच कराकर घरों पर ही इलाज कर रहे हैं लैब एवं संबंधित परिवार को प्रशासन को जानकारी देना चाहिए जिससे संक्रमण रोका जा सके छिपाने वालों पर कार्रवाई भी तुरंत होना चाहिए। पूरे देश ही सहित प्रदेश से भी कई बड़ी मंदिर की संस्थाओं के समाचार मिल रहे हैं कि जहां मंदिर समितियों द्वारा कोरोना संक्रमण के इस अपदाकारी समय पर सहायतार्थ सेवा कार्य किए जा रहे हैं तो मेरी उज्जैन कलेक्टर से भी विनती है कि भगवान महाकालेश्वर उज्जैन में विराजमान है और इनकी कृपा से मंदिर प्रबंध समिति पूर्ण तह सक्षम है।

मंदिर प्रबंध समिति के ही हरसिद्धि धर्मशाला में 50 या 100 बिस्तरों का एक अस्पताल नि:शुल्क रूप से प्रारंभ किया जाना चाहिए। साथ ही मुस्लिम समुदाय सिख समुदाय से भी अनुरोध है कि वह भी अपने धार्मिक संस्थाओं से सहयोग लेकर एक एक अस्पताल प्रारंभ करें।

विधायक महेश परमार ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि क्षेत्र का झगड़ा छोडक़र मानव सेवा में सब को एकजुट होकर अच्छे से अच्छा काम उज्जैन में हो सके और हम कोरोना की लड़ाई प्रदेश में सबसे पहले जीत सके। ऐसी तैयारी हमको करना चाहिए। अस्पतालों में सेवा दे रहे कर्मी, चिकित्सक सेवक मात्र है इन्हें जो संसाधन दिए जा रहे है। उनमें ये समर्पित भाव से सेवा कर रहे है विवाद की स्थिति न बनाये हम सवाल सरकार और प्रशासन से करे। आमजन को इस लकडाउन काल मे आवश्यक खाद्य सामग्री महंगी मिल रही है जिला प्रशासन कीमत निर्धारण पर भी ध्यान दे बिजली बिल पर भी राहत प्रदान कर अप्रैल और मई के बिलों को माफ कर दे।

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