कलेक्टर – एसपी ने धर्मगुरुओं की बैठक में कहा-3 दिन में अनुमति की प्रक्रिया पूर्ण करायें
उज्जैन, अग्निपथ। कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम एवं एसपी सचिन शर्मा ने संयुक्त रूप से शहर के विभिन्न धर्मगुरुओं की बैठक लेकर अवगत कराया कि धार्मिक स्थलों पर लाऊड स्पीकर लगाने की अनुमति लेना अनिवार्य है। धर्मगुरुओं से अपील की कि वे तीन दिवस में उचित प्रक्रिया पूर्ण कराकर सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना आवश्यक है। धार्मिक स्थल पर लाऊड स्पीकर निर्धारित डेसीबल में एक या दो होना चाहिये। दो से अधिक होने पर नियमानुसार सम्बन्धितों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।
लाऊड स्पीकर निर्धारित सीमा से अधिक आवाज होने पर सम्बन्धित के विरूद्ध उडऩदस्तों के द्वारा जांच की जायेगी। ध्वनि प्रदूषण के सम्बन्ध में शिकायत प्राप्त होने पर त्वरित जांच कर कार्यवाही निष्पादित करने के लिये नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जायेगा।
कार्रवाई के लिए उडऩदस्तों का गठन
जिले में नौ अनुभागों में उडऩदस्ता गठित किया गया है। इसमें जिला प्रशासन द्वारा नामित अधिकारी सम्बन्धित थाने के थाना प्रभारी एवं क्षेत्रीय अधिकारी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नामित अधिकारी रहेंगे। बैठक में जिला पंचायत सीईओ मृणाल मीना, नगर निगम आयुक्त रोशन कुमार सिंह, एडीएम अनुकूल जैन, धर्मगुरुओं में डॉ.रामेश्वरदास महाराज, महन्त भगवानदासजी महाराज, इस्कॉन मन्दिर के राघव पंडित, बिशप सेबेस्टियन वडक्केल, खलीकुर्रहमान आदि उपस्थित थे।
बैठक में पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से मप्र प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी एचके तिवारी ने विस्तार से जानकारी से अवगत कराया। उडऩदस्ते नियमित एवं आकस्मिक रूप से निर्धारित उपकरणों के साथ ऐसे धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थानों का औचक निरीक्षण जहां ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग होता हो तथा प्राप्त शिकायतों की आकस्मिक जांच होगी तथा नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जायेगा।
उडऩदस्ते द्वारा जांच के निर्देश प्राप्त होने पर तत्काल जांच कर अधिकतम तीन दिवसों के अन्दर समुचित जांच प्रतिवेदन सम्बन्धित प्राधिकारी के समक्ष किया जायेगा।
यह है मापदण्ड
ध्वनि प्रदूषण नियम के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों जैसे औद्योगिक, वाणिज्यकी रिहायशी व शान्त क्षेत्र में दिन व रात के समय अधिकतम ध्वनि तीव्रता निर्धारित की गई है जैसे औद्योगिक क्षेत्र में दिन की लिमिट 75 डेसीबल एवं रात्रि में 70 डेसीबल, वाणिज्यिक क्षेत्र में दिन में 65 एवं रात्रि में 55, रिहायशी क्षेत्र में दिन में 55 एवं रात्रि में 45 और शान्त क्षेत्र में दिन में 50 एवं रात्रि में 40 डेसीबल है।
ध्वनि प्रदूषण के विनियमन और नियंत्रण के लिये नियम
औद्योगिक गतिविधि, निर्माण, जनरेटर सेट, लाऊड स्पीकर, सार्वजनिक संबोधन प्रणाली, संगीत प्रणाली, वाहनों के हॉर्न और अन्य यांत्रिक उपकरणों जैसे विभिन्न स्रोबोतों से सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते परिवेशीय ध्वनि स्तर का मानव स्वास्थ्य और लोगों के मनोवैज्ञानिक कल्याण पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
ध्वनि के सम्बन्ध में परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानकों को बनाये रखने के उद्देश्य से शोर पैदा करने वाले और उत्पन्न करने वाले स्रोधनतों को विनियमित और नियंत्रित करना आवश्यक माना जाता है। उक्त उद्देश्यों के लिये नियम और अधिनियम अधिसूचित किये गये हैं, जिसमें ध्वनि प्रदूषण नियम-2000 एवं मप्र कोलाहल नियंत्रण अधिनियम-1985 है।