अर्जुन सिंह चंदेल
लुम्बिनी से बुटवाल होते हुए हमें नेपाल की पर्यटन राजधानी और सबसे खूबसूरत शहर पोखरा जिसकी आबादी लगभग 6 लाख है, पहुंचना था। 10-20 किलोमीटर चलने के बाद ही मैदानी रास्ता खत्म हो गया और खूबसूरत पहाड़ चालू हो गये। हरियाली से आच्छादित मार्ग था पर मई का महीना होने से ठंडक का अभाव था।
रास्ते में नेपाल यातायात पुलिस के जवान दो-तीन स्थानों पर मिले जो आकर्षक व्यक्तित्व के नवजवान थे। भंसार (टैक्स रसीद) ठीक होने के बाद भी वसूली कर रहे थे। एक बात विशेष यह थी कि यातायात पुलिस का एक भी जवान उम्रदराज नहीं था। मैदान में तैनात सभी यातायात पुलिसकर्मी 30 से कम उम्र के जवान लडक़े थे।
खैर, सफर पूरा करने के बाद हम पोखरा में प्रवेश कर गये। शाम के लगभग 5 बजे का समय हुआ होगा। हमने ऑनलाइन तो दूसरा होटल तलाश किया था परंतु एक नवजवान से पता पूछने पर उसने कहा मेरा भी होटल देख लीजिये। चतुर और अच्छा मार्केटिंग सिद्धहस्त होने के कारण वह उसके होटल मुत्तिनाथ इन में हमें ले गया और मात्र 1250 रुपए प्रति कमरे के हिसाब से तीन-तीन बेड वाले वातानुकूलित दो कमरे दे दिये। हमारी टीम को मनमाफिक मुराद मिल गई। इतनी सस्ती और सुंदर होटल वह भी पोखरा में, कभी सोचा भी नहीं था।
संगीत-नृत्य की महफिल सजती है फेवा झील के तट पर
खैर, 16 मई की शाम को हम सभी साथी निकल पड़े फेवा झील की ओर। होटल से मुश्किल से आधा किलोमीटर ही दूर थी। हम जब तक झील पर पहुंचे बोटिंग बंद हो चुकी थी, उसका समय शाम 6 बजे तक ही रहता है। फिर भी काफी देर तक झील की सुंदरता को निहारते रहे। फेवा झील के तट पर ही जिसे लेक साइट कहा जाता है, खूब सारे रेस्टोरेंट और बार हैं। जहां संगीत-नृत्य की महफिल सजती है। शाम को पीने के शौकीन, प्रेमी जोड़े, पर्यटक यहां आकर मौज-मस्ती करते हैं।
कुछ लड़कियां गुजरने वाले पर्यटकों से मसाज कराने का आग्रह भी करती हैं। आनंद का यह सिलसिला देर रात 11 बजे तक चलता है। हमारी टीम ने भी चहलकदमी करते हुए जायजा लिया। आपको बताना चाहूंगा कि पोखरा का शाब्दिक अर्थ भी जल से भरा गड्ढा होता है। जो तालाब से छोटा होता है। झीलों और पोखरों की बहुतायत के कारण ही नेपाल के इस खूबसूरत शहर का नाम पोखरा पड़ा।
हिमालय की आठ चोटियों मेें से एक है अन्नपूर्णा, जो यहां से नजदीक ही है। जिसके हिम आच्छादित शिखर को आसानी से देखा जा सकता है। पोखरा का एक और आकर्षण भगवान शंकर का प्रसिद्ध मंदिर मुक्तिनाथ भी यहां से मात्र दो सौ किलोमीटर दूर है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए भी पोखरा एक केंद्र है या बेस कैंप है। हमें बताया गया कि झील के अलावा शहर के रेस्टोरेंट रात्रि 10 बजे बंद हो जायेंगे।
पास ही के चौराहे पर एक रेस्टोरेंट में लजीज भोजन का आनंद लिया और लौट आये अपने होटल में। कल हमें मतलब 17 मई की शाम को पोखरा की प्रसिद्ध फेवा झील में बोटिंग भी करनी थी और सुबह से बाकी स्थान भी देखने थे। एक सनातनी भारतीय पर्यटक होने के कारण हिंदू राष्ट्र नेपाल में एक बात बहुत बुरी लगी जिसका वर्णन कल …।
(शेष अगले अंक में)