शनिश्चरी अमावस्या का स्नान किससे होगा, नर्मदा या खान के पानी से
उज्जैन, अग्निपथ। कार्तिक पूर्णिमा के स्नान की ही तरह लगता है कि इस बार भी 30 नवम्बर को आ रही शनिश्चरी अमावस्या का स्नान श्रद्धालुओं को खान नदी के गंदे पानी में करना होगा। हालांकि प्रशासन नर्मदा के पानी में श्रद्धालुओं को स्नान करवाने की योजना बना रहा है, लेकिन त्रिवेणी पर बने स्टापडेम के खान नदी के ओव्हर फ्लो गंदे पानी को नहीं रोक पा रहा है। ऐसे में इसका गंदा पानी नर्मदा के पानी को भी स्नान और आचमन लायक नहीं छोड़ेगा।
नर्मदा का पानी लाने के लिये कमिश्नर, कलेक्टर को पत्र लिखते हैं। कलेक्टर एनवीडीए को पत्र लिखता है, इसकी मंजूरी मिलती है, तब कहीं जाकर तीन दिन में नर्मदा का पानी शिप्रा में आता है। लेकिन जानकारी रखने वाले जिम्मेदार इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि खान नदी ओव्हर फ्लो चल रही है। इसका गंदा पानी लगातार शिप्रा में मिल रहा है।
जिसके चलते यहां की मछलियां भी प्रदूषित पानी के चलते मरने लगी हैं। एमआईसी के विशेष सम्मिलन में बारिश के बाद शिप्रा नदी के दत्त अखाड़े से लेकर सुनहरी घाट तक फव्वारे लगाने का निगमायुक्त आशीष पाठक का ध्यानाकर्षण करवाया गया था। इसके लिये महापौर मुकेश टटवाल ने जलकार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा के निवेदन पर 5 करोड़ के बजट को बढ़ाकर 10 करोड़ का कर दिया था। इसके बाद भी आज तक प्रदूषित पानी को फव्वारे लगाकर साफ करने की यह योजना क्रियान्वित नहीं हो पाई।
खान का पानी डायवर्ट करने वाली पाइप लाइन जाम
खान नदी के गंदे पानी को डायवर्ट करने के लिये ढाई फीट की पाइप लाइनें बिछाई गई थीं। जिसमें गाद जमी हुई है। जलकार्य समिति प्रभारी द्वारा पिछले एक साल से निवेदन किया जा रहा है, लेकिन इसको आज तक साफ करवाने की जहमत किसी भी अधिकारी ने नहीं उठाई है। इसके बाद खान डायवर्शन की योजना फिर से बन गई और अब यह काम ऐसे ही पड़ा हुआ है। अब स्नान के दौरान खान नदी का पानी डायवर्ट नहीं हो पायेगा और नर्मदा के जल में जाकर इसको भी प्रदूषित कर देगा। जिसके चलते श्रद्धालुओं को खान नदी के गंदे प्रदूषित पानी में स्नान करने को मजबूर होना पड़ेगा।
इंदौर का प्लांट बंद, कारखानों पर अंकुश नहीं
खान नदी के पानी को साफ करने के लिये इंदौर में प्लांट लगा हुआ है। लेकिन यह बंद पड़ा हुआ है। इससे पानी साफ नहीं हो पा रहा है। वहां के अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। उज्जैन के अधिकारी उनका ध्यानाकर्षण नहीं करवा रहे हैं। दूसरी ओर इंदौर के कारखानों के गंदे पानी को उज्जैन की ओर छोड़ा जा रहा है। इस प्रदूषित पानी को रोकने के लिये वहां के अधिकारियों ने फिलहाल कोई कदम नहीं उठाया है, जिसके चलते हर बार नहान के समय इस तरह की स्थिति पैदा होती है।