राज्यसभा में राष्ट्र सम्मान अपमान निवारण विधेयक पास, ‘वंदे मातरम’ को मिला राष्ट्रगान जैसा कानूनी संरक्षण
नई दिल्ली, अग्निपथ। देश भर के लाखों युवाओं के भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए संसद ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने बुधवार को हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस नए कानून के अस्तित्व में आने से अब पेपर लीक और नकल कराने वाले माफियाओं पर शिकंजा पूरी तरह कस जाएगा। नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक से जुड़े अपराधों में दोषियों के लिए न्यूनतम 5 साल से लेकर अधिकतम 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, राज्यसभा ने भी राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के पास होने से अब राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ की तर्ज पर ‘वंदे मातरम’ को भी पूर्ण कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है। अब वंदे मातरम का अनादर करने, अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। दोनों सदनों में दिनभर चले भारी सियासी घमासान के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
नए कानून के प्रमुख और कड़े प्रावधान
पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए जांच प्रक्रिया और त्वरित सुनवाई (स्पीड ट्रायल) को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
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सजा और जुर्माना: साधारण पेपर लीक मामले में सजा 5 से 10 वर्ष की जेल तथा 50 लाख रुपये तक जुर्माना होगा। वहीं, संगठित अपराध (रैकेट) के मामलों में कम से कम 7 साल की जेल और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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समयबद्ध जांच: जांच अधिकारी के लिए मामले की जांच शुरू होने के 2 महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया समाप्त करना अनिवार्य होगा।
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दैनिक सुनवाई: आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट व STF: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अधिकार दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष टास्क फोर्स (STF) का गठन कर जांच सौंप सकेगी।
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15 प्रकार के अपराध सूचीबद्ध: ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट, फर्जी एडमिट कार्ड और पेपर लीक जैसे 15 अलग-अलग कृत्यों को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
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सुरक्षा के नए मानक: परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, प्रश्नपत्र सुरक्षा और परीक्षा प्रबंधन के लिए सख्त मानक तय किए गए हैं।
राहुल गांधी के 50 मिनट के भाषण पर बवाल, ‘इडियट’ शब्द पर घमासान
लोकसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपना वक्तव्य शुरू किया। राहुल गांधी ने अपने 50 मिनट के संबोधन के दौरान ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कठोर बल प्रयोग के आदेश दिए।
इस दौरान तीखी बयानबाजी देखने को मिली:
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स्पीकर की सख्त टिप्पणी: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को 11 से अधिक बार टोकते हुए मर्यादा में रहने की हिदायत दी और कहा कि सदन में असंसदीय शब्दों का प्रयोग कतई स्वीकार्य नहीं है।
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मंत्रियों का विरोध: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 7 बार खड़े होकर नियमों का हवाला दिया और राहुल गांधी से माफी की मांग की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष से विवादित शब्दों को कार्रवाई से हटाने का अनुरोध किया।
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राहुल गांधी का पलटवार: टोके जाने पर राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार चाहती है कि सदन में सिर्फ भाजपा ही बोले, तो वे चुप बैठने को तैयार हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सड़कों पर उतरा देश का युवा किसी नफरत से नहीं, बल्कि अपने हक की आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन कर रहा था।
“संसद में आज मुझे बोलने से रोका गया। नेता प्रतिपक्ष होने के नाते देश के युवाओं और छात्रों के मुद्दों को उठाना मेरा कर्तव्य है। प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया है, जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
— राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष (प्रेस कॉन्फ्रेंस में)
राहुल गांधी का आरोप- छात्रों पर चलीं पैलेट गन; भाजपा ने कहा- संसद मार्च में कोई गोली नहीं चली
लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शाम को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार और गृह मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे मासूम छात्रों पर पुलिस द्वारा पैलेट गन और नुकीली लाठियों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि एक छात्र की आंखों की रोशनी तक चली गई है और उन्होंने खुद मेडिकल सर्टिफिकेट देखा है। राहुल गांधी ने गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सदन में उन्हें बोलने से इसलिए रोका गया क्योंकि वे इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे।
भाजपा ने राहुल गांधी के इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे भ्रामक और असत्य करार दिया है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की गोली या पैलेट गन नहीं चलाई गई। जब गोली चली ही नहीं, तो गृह मंत्री द्वारा आदेश दिए जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पात्रा ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष देश के युवाओं को गुमराह करने के लिए संसद से लेकर सड़क तक झूठ का सहारा ले रहे हैं।

