एयरपोर्ट निर्माण कार्य की गति को लग सकते हैं पंख

भोपाल। उज्जैनवासियों के लिए आज होने वाली मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रिपरिषद की बैठक बड़ी खुशखबर लेकर आ सकती है। उज्जैन में प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए स्वीकृत 437.5 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को लेकर सरकार महत्वपूर्ण फैसला ले सकती है। शासन इस जमीन के अधिग्रहण के लिए 590 करोड़ रुपए मंजूर कर चुका है। अब आपसी सहमति से जमीन लेने वाले किसानों को भी शासकीय दर का चार गुना मुआवजा देने के प्रस्ताव पर फैसला होने की संभावना है। प्रस्ताव पास हुआ तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से पूरी होने के साथ एयरपोर्ट निर्माण की राह में आ रही बड़ी अड़चन दूर हो सकती है।
पहले किसानों से 437.5 एकड़ जमीन आपसी सहमति से लेने का निर्णय किया गया था। इसके लिए किसानों को उनकी भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार दोगुना मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया था। बाद में मुख्यमंत्री ने किसानों से अधिग्रहित की जाने वाली जमीन को आपसी सहमति के बजाय अनिवार्य अधिग्रहण के तहत लेने और शासकीय दर से चार गुना मुआवजा देने की घोषणा की थी।
पहले चरण में 276 एकड़ निजी जमीन का अधिग्रहण
प्रथम चरण में 276 एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण कर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई थी, ताकि प्राधिकरण एयरपोर्ट का विकास कर सके। हालांकि, यहीं मुआवजे को लेकर विसंगति सामने आ गई। जिन किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई, उन्हें शासकीय भूमि दर का दोगुना मुआवजा मिलना है, जबकि अनिवार्य अधिग्रहण के दायरे में आने वाले किसानों को शासकीय दर का चार गुना मुआवजा मिलेगा।
चंद दिनों और छह माह की प्रक्रिया में अंतर
यदि शासन आपसी सहमति से किसानों की भूमि का अधिग्रहण करता है तो प्रक्रिया चंद दिनों में पूरी हो सकती है। वहीं, अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया में कम से कम छह माह का समय लगना स्वाभाविक है। यही अंतर एयरपोर्ट निर्माण की गति को प्रभावित कर रहा है।
इसी विसंगति को दूर करने के लिए आज होने वाली मंत्रिपरिषद की बैठक में संशोधन प्रस्ताव पेश किया जाना है। प्रस्ताव में उज्जैन एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित की जाने वाली किसानों की निजी भूमि, जिसे आपसी सहमति से लिया जाएगा, उसके लिए प्रभावित किसानों को भी शासकीय दर का चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किए जाने की संभावना है।
यदि संशोधन प्रस्ताव पास हुआ तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सकेगी और एयरपोर्ट के निर्माण कार्यों की गति को पंख लग सकते हैं।
95 एकड़ जमीन पर है मौजूदा हवाई पट्टी
वर्तमान में हवाई पट्टी के लिए 95 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इस पर 1,077 मीटर लंबा और 23 मीटर चौड़ा रनवे बना हुआ है। अब प्रथम चरण में बनने वाला नया रनवे 1,800 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा होगा। इसके बाद विस्तार कर इसे 2,700 मीटर लंबा किए जाने की योजना है।
4,060 वर्गमीटर में बनेगा नया टर्मिनल
नया टर्मिनल 4,060 वर्गमीटर क्षेत्रफल में बनाया जाएगा। इसकी वार्षिक यात्री क्षमता 6.4 लाख यात्रियों की होगी, जबकि पीक आवर में 450 यात्रियों को संभालने की क्षमता रहेगी।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने प्रथम चरण में एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, फायर स्टेशन, विद्युत सब-स्टेशन और पहुंच मार्ग के लिए 121.75 करोड़ रुपए की निविदा जारी की है। निविदा जमा करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 तथा निविदा खोले जाने की तारीख 7 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
पहले ATR-72, बाद में Airbus A320 और Boeing 737
प्रथम चरण का कार्य पूरा होने के बाद ATR-72 जैसे विमान मध्यम दूरी और घरेलू उड़ान भर सकेंगे। एयरपोर्ट का पूर्ण विकास होने के बाद Airbus A320 और Boeing 737 जैसे 180 से 190 सीटों की क्षमता वाले विमान भी उज्जैन से उड़ान भर सकेंगे। भविष्य में एयरपोर्ट से कार्गो विमानों के संचालन की भी संभावना है।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. इंदौर एयरपोर्ट से उज्जैन आने वाले यात्रियों का अनुमान
इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर जनवरी 2026 से जुलाई 2026 के सात महीनों के दौरान 25.05 लाख यात्रियों का आना-जाना हुआ। इनमें से उज्जैन महाकालेश्वर दर्शन के लिए आने वाले यात्रियों का सटीक आंकड़ा या प्रतिशत आधिकारिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। हालांकि, अनुमान है कि 25 लाख यात्रियों में से करीब 30 प्रतिशत यानी लगभग 7.5 लाख यात्री उज्जैन आए।
2. 2024 में 7.32 करोड़ पर्यटक-तीर्थयात्री
मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2024 में 7.32 करोड़ पर्यटक एवं तीर्थयात्री उज्जैन आए।
3. सिंहस्थ 2028 में 30-35 करोड़ श्रद्धालुओं का अनुमान
प्रदेश सरकार का अनुमान है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में 30 से 35 करोड़ धर्मालु आएंगे।
4. भविष्य में कार्गो उड़ानें भी
भविष्य में उज्जैन एयरपोर्ट से कार्गो विमानों के संचालन की भी संभावना है।

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